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A R Sahil "Aleeg"
ausatan saath saal ki zindagi jab muhaal hai
ausatan saath saal ki zindagi jab muhaal hai | औसतन साठ साल की ज़िंदगी जब मुहाल है
- A R Sahil "Aleeg"
औसतन
साठ
साल
की
ज़िंदगी
जब
मुहाल
है
आरज़ू
उम्र-ए-आख़िरत
और
जन्नत
की
क्यूँ
करूँं?
- A R Sahil "Aleeg"
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तुम्हें
ज़रूर
कोई
चाहतों
से
देखेगा
मगर
वो
आँखें
हमारी
कहाँ
से
लाएगा
तुम्हारे
साथ
ये
मौसम
फ़रिश्तों
जैसा
है
तुम्हारे
बा'द
ये
मौसम
बहुत
सताएगा
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Bashir Badr
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तेरे
साथ
भी
मुश्किल
पड़ता
था
तेरे
बिन
तो
गुजारा
क्या
होता
गर
तू
भी
नहीं
होता
तो
न
जाने
दोस्त
हमारा
क्या
होता
Siddharth Saaz
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जो
मेरे
साथ
मोहब्बत
में
हुई
आदमी
एक
दफा
सोचेगा
रात
इस
डर
में
गुजारी
हमने
कोई
देखेगा
तो
क्या
सोचेगा
Tehzeeb Hafi
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मौत
के
साथ
हुई
है
मिरी
शादी
सो
'ज़फ़र'
उम्र
के
आख़िरी
लम्हात
में
दूल्हा
हुआ
मैं
Zafar Iqbal
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मैं
अकेला
ही
चला
था
जानिब-ए-मंज़िल
मगर
लोग
साथ
आते
गए
और
कारवाँ
बनता
गया
Majrooh Sultanpuri
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तुम
अगर
साथ
देने
का
वा'दा
करो
मैं
यूँँही
मस्त
नग़्में
लुटाता
रहूँ
तुम
मुझे
देख
कर
मुस्कुराती
रहो
मैं
तुम्हें
देख
कर
गीत
गाता
रहूँ
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Sahir Ludhianvi
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निभाया
जिस
सेे
भी
रिश्ता
तो
फिर
हद
में
रहे
हैं
हम
किसी
के
मखमली
तकिए
के
ऊपर
सर
नहीं
रक्खा
Nirbhay Nishchhal
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बदले
मौसम
हालात
यहाँ
है
ख़ुशियों
की
बारात
यहाँ
होली
खेलेंगे
हम
भी
पर
खेलेंगे
तेरे
साथ
यहाँ
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Kaviraj " Madhukar"
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मुझे
अब
आइनों
की
क्या
ज़रूरत
मैं
अपने
साथ
अब
रहने
लगा
हूँ
Madan Mohan Danish
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जो
बच
गए
हैं
चराग़
उनको
बचाये
रक्खो
मैं
चाहता
हूँ
हवा
से
रिश्ता
बनाये
रक्खो
Azm Shakri
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किया
था
फ़क़त
इश्क़
,
सोचा
नहीं
था
कभी
ये
कज़ा
को
ख़रीदा
हूँ
और
वो
भी
क़िस्तों
में
साहब
A R Sahil "Aleeg"
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इश्क़
में
तीन
हर्फ़
हैं
लेकिन
दर्द
देखें
तो
जाने
कितने
हैं
A R Sahil "Aleeg"
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वजह-ए-बर्बादी
था
मेरा
इश्क़
और
शामिल
ग़ज़ल
कर
रहा
है
इश्क़
फिर
भी
कह
रहा
है
दिल
ग़ज़ल
A R Sahil "Aleeg"
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जाते
जाते
मशवरा
ये
दे
गया
वो
ख़ुश
रहोगे
तुम
अकेला
ही
रहा
कर
A R Sahil "Aleeg"
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शिकायत
तो
बहुत
है
और
सितम
ये,
कर
नहीं
सकता
A R Sahil "Aleeg"
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