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A R Sahil "Aleeg"
aañsu kisi ke ishq men kaaghaz pe gir pade
aañsu kisi ke ishq men kaaghaz pe gir pade | आँसू किसी के इश्क़ में काग़ज़ पे गिर पड़े
- A R Sahil "Aleeg"
आँसू
किसी
के
इश्क़
में
काग़ज़
पे
गिर
पड़े
माज़ी
का
नक़्श
ज़ेहन
पे
फिर
से
उभर
गया
- A R Sahil "Aleeg"
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मैं
सोचता
हूँ
जब
कभी
आओगी
सामने
किस
मुँह
से
कह
सकूँगा
मोहब्बत
नहीं
रही
Shoonya
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यार
इस
में
तो
मज़ा
है
ही
नहीं
कोई
भी
हम
सेे
ख़फ़ा
है
ही
नहीं
इश्क़
ही
इश्क़
है
महसूस
करो
और
कुछ
इसके
सिवा
है
ही
नहीं
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Madhyam Saxena
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वहशत-ए-दिल
के
ख़रीदार
भी
नापैद
हुए
कौन
अब
इश्क़
के
बाज़ार
में
खोलेगा
दुकाँ
Ibn E Insha
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ऐ
मौज-ए-हवादिस
तुझे
मालूम
नहीं
क्या
हम
अहल-ए-मोहब्बत
हैं
फ़ना
हो
नहीं
सकते
Asad Bhopali
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अवल्ली
इश्क़
के
एहसास
भी
तारी
रक्खे
और
इस
बीच
नए
काम
भी
जारी
रक्खे
मैंने
दिल
रख
लिया
है
ये
भी
कोई
कम
तो
नहीं
दूसरा
ढूँढ़
लो
जो
बात
तुम्हारी
रक्खे
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Ashu Mishra
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वो
आदमी
नहीं
है
मुकम्मल
बयान
है
माथे
पे
उस
के
चोट
का
गहरा
निशान
है
वो
कर
रहे
हैं
इश्क़
पे
संजीदा
गुफ़्तुगू
मैं
क्या
बताऊँ
मेरा
कहीं
और
ध्यान
है
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Dushyant Kumar
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कोई
समझे
तो
एक
बात
कहूँ
इश्क़
तौफ़ीक़
है
गुनाह
नहीं
Firaq Gorakhpuri
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तेरे
वादे
से
प्यार
है
लेकिन
अपनी
उम्मीद
से
नफ़रत
है
पहली
ग़लती
तो
इश्क़
करना
थी
शा'इरी
दूसरी
हिमाक़त
है
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Mehshar Afridi
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वो
जिस
घमंड
से
बिछड़ा
गिला
तो
इस
का
है
कि
सारी
बात
मोहब्बत
में
रख-रखाव
की
थी
Ahmad Faraz
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मोहब्बत
में
नहीं
है
फ़र्क़
जीने
और
मरने
का
उसी
को
देख
कर
जीते
हैं
जिस
काफ़िर
पे
दम
निकले
Mirza Ghalib
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छोड़
के
ख़ुशियाँ
ग़म
की
इबादत
कर
लूँ
क्या
इश्क़
की
जानाँ
मैं
भी
तिलावत
कर
लूँ
क्या
A R Sahil "Aleeg"
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वजह-ए-बर्बादी
था
मेरा
इश्क़
और
शामिल
ग़ज़ल
कर
रहा
है
इश्क़
फिर
भी
कह
रहा
है
दिल
ग़ज़ल
A R Sahil "Aleeg"
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हुआ
करती
है
शैतानों
के
मजलिस
में
ये
सरगोशी
भी
अब
अक्सर
अजब
ही
कहर
ढा
रक्खा
है
नाम-ए-इश्क़
पर
इन
हुस्न
वालों
ने
A R Sahil "Aleeg"
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इश्क़
के
जश्न
का
नहीं
है
दिन
इश्क़
के
नाम
पर
है
अय्याशी
A R Sahil "Aleeg"
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जब
मुक़द्दर
में
फ़ना
होना
लिखा
ही
है
हर्ज
क्या
है
फिर
बिखर
कर
ख़ाक
होने
में
A R Sahil "Aleeg"
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