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A R Sahil "Aleeg"
hua karti hai shaitanon ke majlis men ye sargoshi bhi ab akshar
hua karti hai shaitanon ke majlis men ye sargoshi bhi ab akshar | हुआ करती है शैतानों के मजलिस में ये सरगोशी भी अब अक्सर
- A R Sahil "Aleeg"
हुआ
करती
है
शैतानों
के
मजलिस
में
ये
सरगोशी
भी
अब
अक्सर
अजब
ही
कहर
ढा
रक्खा
है
नाम-ए-इश्क़
पर
इन
हुस्न
वालों
ने
- A R Sahil "Aleeg"
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तिरे
जमाल
की
तस्वीर
खींच
दूँ
लेकिन
ज़बाँ
में
आँख
नहीं
आँख
में
ज़बान
नहीं
Jigar Moradabadi
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अब
मैं
समझा
तिरे
रुख़्सार
पे
तिल
का
मतलब
दौलत-ए-हुस्न
पे
दरबान
बिठा
रक्खा
है
Qamar Moradabadi
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शाम
भी
थी
धुआँ
धुआँ
हुस्न
भी
था
उदास
उदास
दिल
को
कई
कहानियाँ
याद
सी
आ
के
रह
गईं
Firaq Gorakhpuri
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तुझे
कौन
जानता
था
मेरी
दोस्ती
से
पहले
तेरा
हुस्न
कुछ
नहीं
था
मेरी
शा'इरी
से
पहले
Kaif Bhopali
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ये
वो
क़बीला
है
जो
हुस्न
को
ख़ुदा
माने
यहाँ
पे
कौन
तेरी
बात
का
बुरा
माने
इशारा
कर
दिया
है
आपकी
तरफ़
मैंने
ये
बच्चे
पूछ
रहे
थे
कि
बे-वफ़ा
माने
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Kushal Dauneria
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मेरे
जुनूँ
का
नतीजा
ज़रूर
निकलेगा
इसी
सियाह
समुंदर
से
नूर
निकलेगा
Ameer Qazalbash
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इश्क़
को
जब
हुस्न
से
नज़रें
मिलाना
आ
गया
ख़ुद-ब-ख़ुद
घबरा
के
क़दमों
में
ज़माना
आ
गया
Asad Bhopali
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अदब
ता'लीम
का
जौहर
है
ज़ेवर
है
जवानी
का
वही
शागिर्द
हैं
जो
ख़िदमत-ए-उस्ताद
करते
हैं
Chakbast Brij Narayan
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चल
गया
होगा
पता
ये
आपको
बे-वफ़ा
कहते
हैं
लड़के
आपको
इक
ज़रा
से
हुस्न
पर
इतनी
अकड़
तू
समझती
क्या
है
अपने
आपको
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Kushal Dauneria
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तुम
को
तो
बस
हुस्न
के
नंबर
मिलते
हैं
उसका
सोचो
जिसको
पढ़ना
पड़ता
है
Kafeel Rana
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मेरी
क़ीमत
लगा
रहा
है
वो
कौड़ियौं
में
जिसे
ख़रीदा
था
A R Sahil "Aleeg"
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जो
था
इश्क़
मेरा
तेरी
दुल्हन
हो
गई
लेकिन
तेरा
रूह
पे
उसकी
क़ब्ज़ा
भी
हो
यार
ज़रूरी
थोड़ी
है
A R Sahil "Aleeg"
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न
ज़ाहिर
हो
चेहरा
फ़क़त
नाम
हो
बस
मेरा
हर
ज़ुबाँ
पर
ज़माने
में
साहिल
मैं
शोहरत
भी
गुमनाम
ही
चाहता
हूँ
A R Sahil "Aleeg"
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मुझे
कहना
बहुत
कुछ,
पूछना
भी
है
बहुत
कुछ
मगर
अब
कहने
सुनने
को
बचा
भी
कुछ
नहीं
है
A R Sahil "Aleeg"
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आज
नफ़रत
है
भले
मेरी
ग़ज़ल
से
तुम
को
लेकिन
गुनगुनाओगी
इन्हीं
ग़ज़लों
को
कल
जब
इश्क़
होगा
A R Sahil "Aleeg"
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