shahar bhar par azaab aata hai | शहर भर पर 'अज़ाब आता है

  - A R Sahil "Aleeg"
शहरभरपर'अज़ाबआताहै
जबभीवोबे-नक़ाबआताहै
वोभी'इज़्ज़त-मआबआताहै
शाख़परजबगुलाबआताहै
मुँहपेडालेनक़ाबआताहै
छतपेजबमाहताबआताहै
जबहुजूम-ए-सहाबआताहै
बर्क़परभीशबाबआताहै
ज़ुल्मबढ़तेहैंरफ़्ता-रफ़्ताऔर
यक-ब-यकइंक़िलाबआताहै
तेज़-रौयादआतीहैउसकी
जिसतरहसैल-ए-आबआताहै
जुर्मकितनेहैंनेकियाँकितनी
रोज़-ए-महशरहिसाबआताहै
रू-ब-रूअच्छेदिननहींआते
जबभीआताहैख़्वाबआताहै
क़हरढाताहैनाज़कालश्कर
जबकिसीपरशबाबआताहै
अबकहींफ़ाख़्तानहींमहफ़ूज़
नौचनेपर'उक़ाबआताहै
लबपेआतीहैंसौतमन्नाएँ
सतहपरज्यूँहबाबआताहै
दमनिकलताहैकालीरातोंका
सजकेजबआफ़ताबआताहै
मय-कदासिर्फ़मैंनहींजाता
वोभी'इज़्ज़त-मआबआताहै
लगनेलगताहैऔरभीकमसिन
जबकिसीपरशबाबआताहै
सजसँवरताहैजबवोशोलारूह
हरतरफ़इल्तिहाबआताहै
खुलनेलगतेहैंबाबमहशरके
ज़ुल्मपरजबशबाबआताहै
ऐसेआताहैमिलनेवोसाहिल
जैसे'आली-जनाबआताहै
  - A R Sahil "Aleeg"
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