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anupam shah
karao ab mirii ghar waapsi bhi o jahaan waalon
karao ab mirii ghar waapsi bhi o jahaan waalon | कराओ अब मिरी घर वापसी भी ओ जहाँ वालों
- anupam shah
कराओ
अब
मिरी
घर
वापसी
भी
ओ
जहाँ
वालों
ये
मेरा
इश्क़
मज़हब
था
मिरा
वो
छोड़
आया
हूँ
- anupam shah
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इश्क़
हमारा
चाँद
सितारे
छू
लेगा
घुटनों
पर
आकर
इज़हार
किया
हमने
Darpan
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तुम्हारी
इक
झलक
से
रंग
उल्फत
के
उड़ाए
हैं
नज़ारों
की
नज़ाकत
को
ज़रा
देखो
मेरी
जानाँ
Aniket sagar
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दुकानें
नफ़रतों
की
ख़ूब
आसानी
से
चलती
हैं
अजब
दुनिया
है
जाने
इश्क़
क्यूँ
करने
नहीं
देती
Bhaskar Shukla
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ये
भी
एजाज़
मुझे
इश्क़
ने
बख़्शा
था
कभी
उस
की
आवाज़
से
मैं
दीप
जला
सकता
था
Ahmad Khayal
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इशारा
कर
रहे
हैं
बाल
ये
बिखरे
हुए
क्या
तू
मेरे
पास
आया
है
कहीं
होते
हुए
क्या
ये
इतना
हँसने
वाले
इश्क़
में
टूटे
हुए
लोग
तू
इन
से
पूछना
अंदर
से
भी
अच्छे
हुए
क्या
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Kushal Dauneria
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मुझे
उस
सेे
मुहब्बत
सच
बड़ी
महँगी
पड़ेगी
अकेलेपन
से
उसने
इश्क़
ऐसा
कर
लिया
है
Anukriti 'Tabassum'
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इश्क़
भी
अपनी
ही
शर्तों
पे
किया
है
मैं
ने
ख़ुद
को
बेचा
नहीं
बाज़ार
में
सस्ता
करके
उस
से
कहना
था
के
वो
कितना
ज़रूरी
है
मुझे
आ
रहा
हूँ
अभी
जिस
शख़्स
से
झगड़ा
करके
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Khan Janbaz
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इश्क़
पहले
बना
था
जाने
जाँ
नींद
की
गोलियाँ
बनीं
थीं
फिर
Ashutosh Kumar "Baagi"
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मुझ
में
है
क्या
कमी
ये
बतला
दो
कैसों
कैसों
को
मिल
गया
है
इश्क़
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Shadab Asghar
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ज़माना
इश्क़
के
मारों
को
मात
क्या
देगा
दिलों
के
खेल
में
ये
जीत
हार
कुछ
भी
नहीं
Akhtar Saeed Khan
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तुम्हें
सोचकर
के
मैं
यूँँ
खिल
रहा
हूँ
कि
करवट
बदल
कर
तुम्हें
मिल
रहा
हूँ
वो
जिस
पर
से
लौटे
हैं
सारे
मुसाफ़िर
मैं
ऐसे
ही
दरिया
का
साहिल
रहा
हूँ
बहुत
वक़्त
बीता
समझने
में
ये
भी
मैं
आसाँ
रहा
हूँ
या
मुश्किल
रहा
हूँ
मुझे
छोड़ने
का
गुमाँ
यूँँ
न
करना
न
जाने
मैं
कितनों
की
मंज़िल
रहा
हूँ
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anupam shah
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बिछड़कर
आपसे
मैं
क्या
करूँँगा
करूँँगा
जो
भी
मैं
अच्छा
करूँँगा
मोहब्बत
दूसरी
हो
तुम
मिरी
पर
मैं
तुम
सेे
इश्क़
पहला
सा
करूँँगा
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anupam shah
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कुछ
तिश्नगी
भी
ऐसे
मिटती
नहीं
हमारी
हक़
में
नहीं
समुंदर
के
प्यास
को
बुझाना
anupam shah
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यानी
अब
उसकी
मुहब्बत
का
हलफ़
माँगूँ
मैं
यानी
अब
सुर्ख़
लबों
पे
मैं
सियाही
फेंकूँ
anupam shah
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लो
जी
रहे
हो
तुम
भी
देखो
बिना
मोहब्बत
तुम
भी
कहा
किए
थे
मर
जाएँगे
यूँँ
हम
तो
anupam shah
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