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Anshika Shukla
palken kaise band karoge
palken kaise band karoge | पलकें कैसे बंद करोगे
- Anshika Shukla
पलकें
कैसे
बंद
करोगे
आँखों
में
अरमाँ
बैठे
हैं
दस्तक
देकर
वापस
आओ
उनके
घर
मेहमाँ
बैठे
हैं
- Anshika Shukla
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ये
क़त्ल-ए-आम
और
बे-इज़्न
क़त्ल-ए-आम
क्या
कहिए
ये
बिस्मिल
कैसे
बिस्मिल
हैं
जिन्हें
क़ातिल
नहीं
मिलता
वहाँ
कितनों
को
तख़्त
ओ
ताज
का
अरमाँ
है
क्या
कहिए
जहाँ
साइल
को
अक्सर
कासा-ए-साइल
नहीं
मिलता
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Asrar Ul Haq Majaz
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इक
तर्ज़-ए-तग़ाफ़ुल
है
सो
वो
उन
को
मुबारक
इक
अर्ज़-ए-तमन्ना
है
सो
हम
करते
रहेंगे
Faiz Ahmad Faiz
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मिरी
आरज़ू
का
हासिल
तिरे
लब
की
मुस्कुराहट
हैं
क़ुबूल
मुझ
को
सब
ग़म
तिरी
इक
ख़ुशी
के
बदले
Kashif Adeeb Makanpuri
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उम्र-ए-दराज़
माँग
के
लाई
थी
चार
दिन
दो
आरज़ू
में
कट
गए
दो
इंतिज़ार
में
Seemab Akbarabadi
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नहीं
निगाह
में
मंज़िल
तो
जुस्तुजू
ही
सही
नहीं
विसाल
मुयस्सर
तो
आरज़ू
ही
सही
Faiz Ahmad Faiz
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बहाने
और
भी
होते
जो
ज़िंदगी
के
लिए
हम
एक
बार
तिरी
आरज़ू
भी
खो
देते
Majrooh Sultanpuri
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हम
जानते
तो
इश्क़
न
करते
किसू
के
साथ
ले
जाते
दिल
को
ख़ाक
में
इस
आरज़ू
के
साथ
Meer Taqi Meer
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मैं
सो
रहा
हूँ
तेरे
ख़्वाब
देखने
के
लिए
ये
आरज़ू
है
कि
आँखों
में
रात
रह
जाए
Shakeel Azmi
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मुझे
ये
डर
है
तेरी
आरज़ू
न
मिट
जाए
बहुत
दिनों
से
तबीअत
मिरी
उदास
नहीं
Nasir Kazmi
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हुस्न
बख़्शा
जो
ख़ुदा
ने
आप
बख़्शें
दीद
अपनी
आरज़ू–ए–चश्म
पूरी
हो
मुकम्मल
ईद
अपनी
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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तार
साँसों
का
लुटे
मौत
गिरेबाँ
में
रहे
वो
मेरी
जाँ
है
उसे
हक़
है
मेरी
जाँ
में
रहे
Anshika Shukla
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टूटा
सूखा
पत्ता
पतझर
में
कहने
लगता
है
मुझ
सेे
अब
जब
हम
बर्बाद
हुए
हैं
तब
जाकर
के
महकी
हो
तुम
Anshika Shukla
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सज़ा
का
हुक्म
सर
आँखों
पे
है
बस
हमें
थोड़ी
सी
मोहलत
चाहिए
थी
Anshika Shukla
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तेरा
मेयार
तो
अपनी
जगह
है
मगर
बीमार
तो
अपनी
जगह
है
बहुत
कुछ
लुट
चुका
है
इस
जहाँ
से
अभी
बाज़ार
तो
अपनी
जगह
है
हर
इक
सूरत
की
रा'नाई
है
मद्धम
वो
इक
रुख़्सार
तो
अपनी
जगह
है
किसे
रस्मों
रिवाजों
से
तअल्लुक़
यहाँ
दरकार
तो
अपनी
जगह
है
जिसे
चाहे
सज़ा
का
हुक़्म
कर
दे
तेरी
सरकार
तो
अपनी
जगह
है
मोहब्बत
में
किफ़ायत
किश्त
क़र्ज़ा
ये
कारोबार
तो
अपनी
जगह
है
हटाकर
आज
तस्वीरों
को
देखा
दर-ओ-दीवार
तो
अपनी
जगह
है
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Anshika Shukla
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हर
इक
शाम
अपनी
हदें
तोड़कर
के
ये
दोनों
किनारे
किधर
जा
रहे
हैं
Anshika Shukla
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