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Anshika Shukla
toota sookha patta patjhar men kehne lagta hai mujhse
toota sookha patta patjhar men kehne lagta hai mujhse | टूटा सूखा पत्ता पतझर में कहने लगता है मुझ सेे
- Anshika Shukla
टूटा
सूखा
पत्ता
पतझर
में
कहने
लगता
है
मुझ
सेे
अब
जब
हम
बर्बाद
हुए
हैं
तब
जाकर
के
महकी
हो
तुम
- Anshika Shukla
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हिज्र
में
तुमने
केवल
बाल
बिगाड़े
हैं
हमने
जाने
कितने
साल
बिगाड़े
हैं
Anand Raj Singh
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किसी
से
दूरी
बनाई
किसी
के
पास
रहे
हज़ार
कोशिशें
कर
लीं
मगर,
उदास
रहे
Sawan Shukla
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'हर्ष'
वस्ल
में
जितनी
मर्ज़ी
शे'र
कह
लो
तुम
हिज्र
के
बिना
इन
में
जान
आ
नहीं
सकती
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Harsh saxena
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लो
फिर
तिरे
लबों
पे
उसी
बे-वफ़ा
का
ज़िक्र
अहमद-'फ़राज़'
तुझ
से
कहा
ना
बहुत
हुआ
Ahmad Faraz
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मेहरबाँ
हम
पे
हर
इक
रात
हुआ
करती
थी
आँख
लगते
ही
मुलाक़ात
हुआ
करती
थी
हिज्र
की
रात
है
और
आँख
में
आँसू
भी
नहीं
ऐसे
मौसम
में
तो
बरसात
हुआ
करती
थी
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Ismail Raaz
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दबी
कुचली
हुई
सब
ख़्वाहिशों
के
सर
निकल
आए
ज़रा
पैसा
हुआ
तो
च्यूँँटियों
के
पर
निकल
आए
अभी
उड़ते
नहीं
तो
फ़ाख़्ता
के
साथ
हैं
बच्चे
अकेला
छोड़
देंगे
माँ
को
जिस
दिन
पर
निकल
आए
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Mehshar Afridi
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आज
भी
वो
वो
ही
है
और
अदा
भी
वो
ही
है
बे-वफ़ा
भी
वो
ही
है
और
ख़फ़ा
भी
वो
ही
है
Aatish Indori
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इस
से
पहले
कि
ज़मीं-ज़ाद
शरारत
कर
जाएँ
हम
सितारों
ने
ये
सोचा
है
कि
हिजरत
कर
जाएँ
दौलत-ए-ख़्वाब
हमारे
जो
किसी
काम
न
आई
अब
किसी
को
नहीं
मिलने
की
वसिय्यत
कर
जाएँ
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Idris Babar
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उस
मेहरबाँ
नज़र
की
इनायत
का
शुक्रिया
तोहफ़ा
दिया
है
ईद
पे
हम
को
जुदाई
का
Unknown
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एक
अकेले
की
ख़ातिर
जब
दो
कप
कॉफी
में
चीनी
आज
मिलाते
हैं
तो
रो
देते
हैं
हम
Atul K Rai
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कहीं
इंसान
ही
पत्थर
कहीं
पत्थर
की
मूरत
है
कभी
घर
से
निकलते
हैं
तो
जादू
देख
लेते
हैं
Anshika Shukla
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तेरा
मेयार
तो
अपनी
जगह
है
मगर
बीमार
तो
अपनी
जगह
है
बहुत
कुछ
लुट
चुका
है
इस
शहरस
अभी
बाज़ार
तो
अपनी
जगह
है
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Anshika Shukla
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मेरी
उम्मीद
कम
नहीं
करना
मेरे
जाने
का
ग़म
नहीं
करना
आँख
भीगे
तो
ख़्वाब
बहते
हैं
ख़्वाब
पर
ये
सितम
नहीं
करना
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Anshika Shukla
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चहरे
कैसे
हो
जाते
हैं
सपनों
जैसे
हो
जाते
हैं
वादे,
रिश्ते,
लोग
वगैरह
कैसे
कैसे
हो
जाते
हैं
अच्छे
ख़ासे
इश्क़
में
आके
ऐसे-वैसे
हो
जाते
हैं
सब
सेे
मुश्किल
काम
करें
क्या?
पहले
जैसे
हो
जाते
हैं
अब
हम
शे'र
नहीं
कहते
हैं
जैसे-तैसे
हो
जाते
हैं
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Anshika Shukla
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इतना
लुटे
कि
हिज्र
मनाया
नहीं
गया
हम
सेे
कभी
पलट
के
बुलाया
नहीं
गया
आँखों
से
आरज़ू
तो
गई
ख़्वाब
भी
गए
तेरा
तो
एक
वार
भी
ज़ाया'
नहीं
गया
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Anshika Shukla
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