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Anjali Sahar
hai in diyon ka muqaddar bhi betiyon jaisa
hai in diyon ka muqaddar bhi betiyon jaisa | है इन दियों का मुक़द्दर भी बेटियों जैसा
- Anjali Sahar
है
इन
दियों
का
मुक़द्दर
भी
बेटियों
जैसा
कहाँ
बनाए
गए
और
हुए
कहाँ
रौशन
- Anjali Sahar
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वो
तिरे
नसीब
की
बारिशें
किसी
और
छत
पे
बरस
गईं
दिल-ए-बे-ख़बर
मिरी
बात
सुन
उसे
भूल
जा
उसे
भूल
जा
Amjad Islam Amjad
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कभी
मैं
अपने
हाथों
की
लकीरों
से
नहीं
उलझा
मुझे
मालूम
है
क़िस्मत
का
लिक्खा
भी
बदलता
है
Bashir Badr
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मैं
ख़ुद
भी
यार
तुझे
भूलने
के
हक़
में
हूँ
मगर
जो
बीच
में
कम-बख़्त
शा'इरी
है
ना
Afzal Khan
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जो
मिल
गया
उसी
को
मुक़द्दर
समझ
लिया
जो
खो
गया
मैं
उस
को
भुलाता
चला
गया
Sahir Ludhianvi
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परिंद
पेड़
से
परवाज़
करते
जाते
हैं
कि
बस्तियों
का
मुक़द्दर
बदलता
जाता
है
Asad Badayuni
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जुदा
किसी
से
किसी
का
ग़रज़
हबीब
न
हो
ये
दाग़
वो
है
कि
दुश्मन
को
भी
नसीब
न
हो
Nazeer Akbarabadi
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खो
दिया
तुम
को
तो
हम
पूछते
फिरते
हैं
यही
जिस
की
तक़दीर
बिगड़
जाए
वो
करता
क्या
है
Firaq Gorakhpuri
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मुझको
बदन
नसीब
था
पर
रूह
के
बग़ैर
उसने
दिया
भी
फूल
तो
ख़ुशबू
निकाल
कर
Ankit Maurya
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घर
से
निकले
हुए
बेटों
का
मुक़द्दर
मालूम
माँ
के
क़दमों
में
भी
जन्नत
नहीं
मिलने
वाली
Iftikhar Arif
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हुस्न
को
भी
कहाँ
नसीब
'जिगर'
वो
जो
इक
शय
मिरी
निगाह
में
है
Jigar Moradabadi
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बे-वजह
क्यूँँ
मिरे
दिल
तू
धकधक
करे
इक
नज़र
दर
पे
और
इक
घड़ी
की
तरफ़
Anjali Sahar
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तेरी
ग़ज़लें
निरी
उदासी
है
ज़िंदगी
क्या
है
जी
उदासी
है
जो
तुम्हें
खा
रही
है
अंदर
से
ऐसी
भी
कौन
सी
उदासी
है
मेरे
सीने
में
पल
रही
है
जो
दुनिया
की
आख़िरी
उदासी
है
ऐसी
कुछ
शय
नहीं
थी
पहले
पहल
मेरे
ग़म
से
बनी
उदासी
है
ज़िंदगी
अब
कुछ
और
नहीं
दरकार
मुझे
अच्छी
भली
उदासी
है
मुझे
क्या
लेना
देना
ख़ुशियों
से
मुझे
तो
हर
ख़ुशी
उदासी
है
शर्म
से
डूब
मरने
का
है
मक़ाम
तेरे
होते
ख़ुशी
उदासी
है
अब
कोई
ग़म
भी
ग़म
नहीं
लगता
तेरा
ग़म
आख़िरी
उदासी
है
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Anjali Sahar
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तेरी
तस्वीर
गर
नहीं
होती
मेरी
आँखें
तरस
गईं
होती
दिल-ए-नादाँ
तू
गर
नहीं
होता
ग़म
न
होता
ख़ुशी
नहीं
होती
गर
हमें
सब्र-ओ-ज़ब्त
आ
जाता
अपनी
जन्नत
यही
ज़मीं
होती
बात
हम
लोग
ही
बढ़ाते
हैं
बात
इतनी
बड़ी
नहीं
होती
अगर
इस
दिल
की
मान
लेते
हम
तुम
कहीं
होते
मैं
कहीं
होती
कुछ
तो
अपना
भी
हाथ
होता
है
बात
बस
बख़्त
की
नहीं
होती
हमने
इस
डर
से
हाथ
काट
लिए
साँप
होते
गर
आस्तीं
होती
इस
पहेली
के
और
भी
हल
हैं
एक
हल
मौत
ही
नहीं
होती
हाए
कितनी
हसीन
सूरत
है
हाए
सीरत
भी
कुछ
हसीं
होती
हमने
दिन
रात
एक
कर
दिए
हैं
ख़्वाब
सी
ज़िंदगी
नहीं
होती
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Anjali Sahar
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इसका
मतलब
कि
ज़िन्दगी
दुख
है
सब
यही
कहते
हैं
अजी
दुख
है
इस
नई
नस्ल
के
हैं
ढ़ेरों
दुख
पहला
दुख
वक़्त
की
कमी
दुख
है
और
सुनाओ
कि
कैसी
कट
रही
है
और
तो
क्या
है
बस
वही
दुख
है
मुझे
मेरा
मिज़ाज
ले
डूबा
इस
ज़माने
में
सादगी
दुख
है
जब
से
इक
शख़्स
छोड़
कर
गया
है
मेरी
सब
सेे
बड़ी
ख़ुशी
दुख
है
वैसे
तो
तेरा
दुख
बड़ा
दुख
था
तेरे
बाद
अब
तेरी
कमी
दुख
है
अब
तो
ये
भी
समझ
से
बाहर
है
किस
का
दुख
है
जो
वाक़ई
दुख
है
मुझे
सबने
यही
बताया
है
कि
तेरे
सीने
में
कोई
दुख
है
मैं
तुम्हें
भूलने
लगी
हूँ
अब
मैं
समझती
थी
दाइमी
दुख
है
और
तो
क्या
कमाया
है
हमने
सारा
सरमाया
बस
यही
दुख
है
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Anjali Sahar
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ज़िंदगी
अब
कुछ
और
नहीं
दरकार
मुझे
अच्छी
भली
उदासी
है
Anjali Sahar
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