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Anjali Sahar
iska matlab ki zindagi dukh hai
iska matlab ki zindagi dukh hai | इसका मतलब कि ज़िन्दगी दुख है
- Anjali Sahar
इसका
मतलब
कि
ज़िन्दगी
दुख
है
सब
यही
कहते
हैं
अजी
दुख
है
इस
नई
नस्ल
के
हैं
ढ़ेरों
दुख
पहला
दुख
वक़्त
की
कमी
दुख
है
और
सुनाओ
कि
कैसी
कट
रही
है
और
तो
क्या
है
बस
वही
दुख
है
मुझे
मेरा
मिज़ाज
ले
डूबा
इस
ज़माने
में
सादगी
दुख
है
जब
से
इक
शख़्स
छोड़
कर
गया
है
मेरी
सब
सेे
बड़ी
ख़ुशी
दुख
है
वैसे
तो
तेरा
दुख
बड़ा
दुख
था
तेरे
बाद
अब
तेरी
कमी
दुख
है
अब
तो
ये
भी
समझ
से
बाहर
है
किस
का
दुख
है
जो
वाक़ई
दुख
है
मुझे
सबने
यही
बताया
है
कि
तेरे
सीने
में
कोई
दुख
है
मैं
तुम्हें
भूलने
लगी
हूँ
अब
मैं
समझती
थी
दाइमी
दुख
है
और
तो
क्या
कमाया
है
हमने
सारा
सरमाया
बस
यही
दुख
है
- Anjali Sahar
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ये
शाम
ख़ुशबू
पहन
के
तेरी
ढली
है
मुझ
में
जो
रेज़ा
रेज़ा
मैं
क़तरा
क़तरा
पिघल
रही
हूँ
ख़मोश
शब
के
समुंदरों
में
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Kiran K
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जब
भी
कोई
मंज़िल
हासिल
करता
हूँ
याद
बहुत
आती
हैं
तेरी
ता'रीफ़ें
Tanoj Dadhich
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इश्क़
अगर
बढ़ता
है
तो
फिर
झगड़े
भी
तो
बढ़ते
हैं
आमदनी
जब
बढ़ती
है
तो
ख़र्चे
भी
तो
बढ़ते
हैं
माना
मंज़िल
नहीं
मिली
है
हमको
लेकिन
रोज़ाना
एक
क़दम
उसकी
जानिब
हम
आगे
भी
तो
बढ़ते
हैं
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Tanoj Dadhich
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मैं
सोचता
हूँ
जब
कभी
आओगी
सामने
किस
मुँह
से
कह
सकूँगा
मोहब्बत
नहीं
रही
Shoonya
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ग़ुबार-ए-वक़्त
में
अब
किस
को
खो
रही
हूँ
मैं
ये
बारिशों
का
है
मौसम
कि
रो
रही
हूँ
मैं
Shahnaz Parveen Sahar
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जिस
मौसम
में
भीगना
है
हम
दोनों
को
उस
मौसम
में
पूछ
रही
हो
छाता
है
Zubair Alam
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उसे
पागल
बनाती
फिर
रही
हो
जिसे
शौहर
बनाना
चाहिए
था
Arvind Inaayat
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वो
राही
हूँ
पलभर
के
लिए,
जो
ज़ुल्फ़
के
साए
में
ठहरा,
अब
ले
के
चल
दूर
कहीं,
ऐ
इश्क़
मेरे
बेदाग
मुझे
।
Raja Mehdi Ali Khan
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बर्बाद
कर
दिया
हमें
परदेस
ने
मगर
माँ
सब
से
कह
रही
है
कि
बेटा
मज़े
में
है
Munawwar Rana
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दिल
की
तमन्ना
थी
मस्ती
में
मंज़िल
से
भी
दूर
निकलते
अपना
भी
कोई
साथी
होता
हम
भी
बहकते
चलते
चलते
Majrooh Sultanpuri
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दो
चार
पल
का
है
ये
ग़म-ए-तीरगी
सहर
लाई
है
अपने
साथ
सदा
रौशनी
सहर
जज़्बात
दूसरों
के
समझता
है
कौन
अब
है
अपनी
अपनी
सबकी
ग़मी
और
ख़ुशी
सहर
दौर-ए-ग़म-ए-फ़िराक़
भी
दुख
है
कोई
भला
देखी
नहीं
है
तुमने
अभी
बेबसी
सहर
मंज़िल
अगर
क़रीब
है
तो
छू
के
देखिए
पानी
है
या
सराब
कोई
'अंजली
सहर'
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Anjali Sahar
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जब
से
इक
शख़्स
छोड़
कर
गया
है
मेरी
सब
सेे
बड़ी
ख़ुशी
दुख
है
Anjali Sahar
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मुश्किलों
से
भरी
डगर
है
एक
ज़िंदगी
जीना
भी
हुनर
है
एक
धूप
तो
कोई
मसअला
ही
नहीं
हाँ!
तुम्हें
साया-ए-शजर
है
एक
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Anjali Sahar
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जिस
सेे
डर
कर
गए
ख़ुद-कुशी
की
तरफ़
लौट
आए
उसी
ज़िंदगी
की
तरफ़
बे-वजह
क्यूँँ
मेरे
दिल
तू
धकधक
करे
इक
नज़र
दर
पे
और
इक
घड़ी
की
तरफ़
दो
दिलों
को
मुहब्बत
से
वीरान
कर
मोड़
देते
हैं
इक
अजनबी
की
तरफ़
सरसरी
बात
कोई
मैं
करती
नहीं
ग़ौर
कीजे
मिरी
हर
कही
की
तरफ़
तकते
हैं
ग़म
मिरी
ओर
उम्मीद
से
बाहें
फैलाऊँ
कैसे
ख़ुशी
की
तरफ़
ऐ
मुसाफ़िर
खड़ा
किसका
रस्ता
तके
कोई
आता
नहीं
इस
गली
की
तरफ़
ज़िंदगी
है
कि
रुकती
नहीं
और
'सहर'
कोई
रस्ता
नहीं
वापसी
की
तरफ़
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Anjali Sahar
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ज़िंदगी
अब
कुछ
और
नहीं
दरकार
मुझे
अच्छी
भली
उदासी
है
Anjali Sahar
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