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Animesh Choubey
uljhi jo unse nazrein uljhti hi chali gaii
uljhi jo unse nazrein uljhti hi chali gaii | उलझी जो उन सेे नज़रें, उलझती ही चली गई
- Animesh Choubey
उलझी
जो
उन
सेे
नज़रें,
उलझती
ही
चली
गई
थमी
जो
दिल
की
धड़कन
थमती
ही
चली
गई
होंठों
से
बरसती
रही
तबस्सुम
बनकर
चांदनी
जो
खुलती
गई
ज़ुल्फ़ें,
रात
गहराती
चली
गई
- Animesh Choubey
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कम
अज़
कम
इक
ज़माना
चाहता
हूँ
कि
तुम
को
भूल
जाना
चाहता
हूँ
ख़ुदारा
मुझ
को
तन्हा
छोड़
दीजे
मैं
खुल
कर
मुस्कुराना
चाहता
हूँ
सरासर
आप
हूँ
मद्दे
मुक़ाबिल
ख़ुदी
ख़ुद
को
हराना
चाहता
हूँ
मेरे
हक़
में
उरूस-ए-शब
है
मक़्तल
सो
उस
से
लब
मिलाना
चाहता
हूँ
ये
आलम
है,
कि
अपने
ही
लहू
में
सरासर
डूब
जाना
चाहता
हूँ
सुना
है
तोड़ते
हो
दिल
सभों
का
सो
तुम
से
दिल
लगाना
चाहता
हूँ
उसी
बज़्म-ए-तरब
की
आरज़ू
है
वही
मंज़र
पुराना
चाहता
हूँ
नज़र
से
तीर
फैंको
हो,
सो
मैं
भी
जिगर
पर
तीर
खाना
चाहता
हूँ
चराग़ों
को
पयाम-ए-ख़ामुशी
दे
तेरे
नज़दीक
आना
चाहता
हूँ
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Kazim Rizvi
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बिगड़
गई
थी
जो
दुनिया
सॅंवार
दी
हमने
चढ़ा
के
सर
पे
मुहब्बत
उतार
दी
हमने
अँधेरी
रात
किसी
बे-वफ़ा
की
यादों
में
बहुत
तवील
थी
लेकिन
गुज़ार
दी
हमने
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Hameed Sarwar Bahraichi
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खुलती
है
मेरी
नींद
हर
इक
रात
दो
बजे
इक
रात
दो
बजे
मुझे
छोड़ा
था
आपने
Tanoj Dadhich
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उम्र
शायद
न
करे
आज
वफ़ा
काटना
है
शब-ए-तन्हाई
का
Altaf Hussain Hali
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जागना
और
जगा
के
सो
जाना
रात
को
दिन
बना
के
सो
जाना
Ali Zaryoun
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अभी
हमको
मुनासिब
आप
होते
से
नहीं
लगते
ब–चश्म–ए–तर
मुख़ातिब
हैं
प
रोते
से
नहीं
लगते
वही
दर्या
बहुत
गहरा
वही
तैराक
हम
अच्छे
हुआ
है
दफ़्न
मोती
अब
कि
गोते
से
नहीं
लगते
ये
आई
रात
आँखों
को
चलो
खूँ–खूँ
किया
जाए
बदन
ये
सो
भी
जाए
आँख
सोते
से
नहीं
लगते
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Dhiraj Singh 'Tahammul'
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बदन
लिए
तलाशता
फिरू
हूँ
रात
दिन
उसे
सुना
है
जान
भी
मेरी
कहीं
इसी
शहर
में
है
Bhaskar Shukla
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रात
का
इंतिज़ार
कौन
करे
आज
कल
दिन
में
क्या
नहीं
होता
Bashir Badr
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ये
ज़ुल्फ़
अगर
खुल
के
बिखर
जाए
तो
अच्छा
इस
रात
की
तक़दीर
सँवर
जाए
तो
अच्छा
जिस
तरह
से
थोड़ी
सी
तेरे
साथ
कटी
है
बाक़ी
भी
उसी
तरह
गुज़र
जाए
तो
अच्छा
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Sahir Ludhianvi
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ये
सर्द
रात
ये
आवारगी
ये
नींद
का
बोझ
हम
अपने
शहर
में
होते
तो
घर
चले
जाते
Ummeed Fazli
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क़यामत
तो
फिर
भी
एक
दिन
ठहर
ही
जायेगी
तेरी
'मुस्कुराहट'
का
जाने
क्या
सिलसिला
होगा
Animesh Choubey
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मिल
चुके
हैं
ख़ाक
में
और
वो
बेख़बर
है
कबसे
अब
निकल
चुकी
है
’जान’
और
’जान’
खफा
है
कबसे
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Animesh Choubey
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टूट
जाया
करते
हैं
सितारे
भी
जिन्हें
देखकर
बता
किस
हौसले
से
उन
सेे
नज़रें
मिलाएं
हम
Animesh Choubey
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तेरे
चाहने
वाले
बर्बाद
होंगे
या
आबाद
होंगे
अब
तो
जो
भी
होंगे,
सारे
बे-हिसाब
होंगे
Animesh Choubey
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एक
खिड़की
है,
एक
गली
है,
एक
पता
है
सौ
बार
गुजर
के
भी
भुल
जाना
मेरी
खता
है
Animesh Choubey
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