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Aniket sagar
mehfil saji hui thii sunsaan kar ga.e vo
mehfil saji hui thii sunsaan kar ga.e vo | महफ़िल सजी हुई थी सुनसान कर गए वो
- Aniket sagar
महफ़िल
सजी
हुई
थी
सुनसान
कर
गए
वो
गुलज़ार
दिल
को
मेरे
शमशान
कर
गए
वो
दिल
में
मुझे
बसा
कर
अपना
बना
लिया
था
फिर
क्या
हुआ
न
जाने
अंजान
कर
गए
वो
- Aniket sagar
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महफ़िल
में
तेरी
यूँँ
ही
रहे
जश्न-ए-चरागाँ
आँखों
में
ही
ये
रात
गुज़र
जाए
तो
अच्छा
Sahir Ludhianvi
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अदब
वाले
अदब
की
महफ़िलें
पहचान
लेते
हैं
उन्हें
तुम
प्यार
से
कुछ
भी
कहो
वो
मान
लेते
हैं
जहाँ
तक
देख
सकते
हैं
वहाँ
तक
सुन
नहीं
सकते
मगर
जब
इश्क़
हो
जाए
तो
धड़कन
जान
लेते
हैं
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Hameed Sarwar Bahraichi
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पहले
कहता
है
जुनूँ
उसका
गिरेबान
पकड़
फिर
मेरा
दिल
मुझे
कहता
है
इधर
कान
पकड़
ऐसी
वहशत
भी
न
हो
घर
के
दरो
बाम
कहें
कोई
आवाज़
ही
ले
आ
कोई
मेहमान
पकड़
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Azbar Safeer
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मैं
ने
आबाद
किए
कितने
ही
वीराने
'हफ़ीज़'
ज़िंदगी
मेरी
इक
उजड़ी
हुई
महफ़िल
ही
सही
Hafeez Banarasi
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ज़ख़्म
उनके
लिए
मेहमान
हुआ
करते
हैं
मुफ़लिसी
जो
तेरे
दरबान
हुआ
करते
हैं
वो
अमीरों
के
लिए
आम
सी
बातें
होंगी
हम
ग़रीबों
के
जो
अरमान
हुआ
करते
हैं
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Mujtaba Shahroz
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महीनों
तक
रहा
करते
थे
सब
मेहमान
आँखों
में,
मगर
अब
ख़्वाब
भी
आते
नहीं
वीरान
आँखों
में
ज़मान
ए
हिज्र
कहने
को
रिवाज़
ए
इश्क़
ही
तो
है,
मगर
क्या
क्या
नहीं
होता
है
इस
दौरान
आँखों
में
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Darpan
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फिर
आज
यारों
ने
तुम्हारी
बात
की
फिर
यार
महफ़िल
में
मिरी
खिल्ली
उड़ी
Harsh saxena
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चराग़
घर
का
हो
महफ़िल
का
हो
कि
मंदिर
का
हवा
के
पास
कोई
मसलहत
नहीं
होती
Waseem Barelvi
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एक
महफ़िल
में
कई
महफ़िलें
होती
हैं
शरीक
जिस
को
भी
पास
से
देखोगे
अकेला
होगा
Nida Fazli
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पहले
ख़याल
रख
मिरा
मेहमान
कर
मुझे
फिर
अपनी
कोई
चाल
से
हैरान
कर
मुझे
हैं
कौन
आप,
याद
नहीं,कब
मिले
थे
हम
इतना
भी
ख़ुश
न
होइए
पहचान
कर
मुझे
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
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सिर्फ़
मेरा
मन
नहीं
ये
आसमाँ
भी
रो
पड़ा
था
बेहया
जैसे
मुझे
तू
छोड़
कर
जब
जा
रही
थी
Aniket sagar
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कभी
आसान
होती
है
कभी
मुश्किल
बड़ी
होती
कहाँ
होती
शुरू
किस
मोड़
पर
आकर
खड़ी
होती
यही
बस
ज़िंदगी
का
सार
समझोगे
तो
बेहतर
है
कभी
बरसात
सुख
की
है
कभी
ग़म
की
झड़ी
होती
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Aniket sagar
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मेरी
संतान
से
मेरा
अलग
दुर्लभ
ही
नाता
है
उसे
इक
मैं
मुझे
इक
वो
हमेशा
से
ही
भाता
है
लिखूंँ
तो
काव्य
उसका
नाम
गाऊंँ
तो
तराना
है
वो
मुझ
सेे
ही
मुझे
हर
रोज़
आकर
के
मिलाता
है
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Aniket sagar
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मैं
कमाऊँ
शोहरतें
किसके
लिए
सागर
हाँ
जताने
को
कोई
होता
तो
होता
कुछ
Aniket sagar
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मिरे
दिल
में
सजाना
चाहता
हूँ
तुझे
अपना
बनाना
चाहता
हूँ
कभी
सीखा
नहीं
शायद
ये
हँसना
जी
भर
तुझको
हँसाना
चाहता
हूँ
बड़े
नज़दीक
से
देखा
जो
तूने
उसी
ग़म
को
मिटाना
चाहता
हूँ
जहाँ
रौशन
है
मुस्तक़बिल
मिरा
मैं
वहाँ
जीवन
बिताना
चाहता
हूँ
नज़र
के
सामने
लाकर
तुझे
मैं
गले
से
जाँ
लगाना
चाहता
हूँ
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Aniket sagar
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