kyun zeest ka har ek fasana badal gaya | क्यूँँ ज़ीस्त का हर एक फ़साना बदल गया

  - Anand Narayan Mulla
क्यूँँज़ीस्तकाहरएकफ़सानाबदलगया
येहमबदलगएकिज़मानाबदलगया
सय्यादयाँवहीवहीताइरवहीहैंदाम
लेकिनजोज़ेर-ए-दामथादानाबदलगया
बाज़ी-ए-हुस्न-ओ-इश्क़मेंकुछहारहैजीत
नज़रेंमिलींदिलोंकाख़ज़ानाबदलगया
बख़्त-ए-बशरवहीहैबिसात-ए-जहाँवही
हरदौर-ए-नौमेंमातकाख़ानाबदलगया
ताक़तकेदोशपरहैअज़लसेबशरकीलाश
बसथोड़ीथोड़ीदूरपेशानाबदलगया
महफ़िलकेहस्ब-ए-ज़ौक़हैमुतरिबकासाज़भी
महफ़िलबदलगईतोतरानाबदलगया
इनदाग़-हा-ए-दिलमेंकोईज़ख़्म-ए-नौनहीं
शायदकिसीनज़रकानिशानाबदलगया
'मुल्ला'कोज़ोर-ए-तब्अहुआफ़ैसलोंकीनज़्र
दरियाअभीवहीहैदहानाबदलगया
  - Anand Narayan Mulla
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