daroon-e-dil jo charaaghh jalte rahe musalsal | दरून-ए-दिल जो चराग़ जलते रहे मुसलसल

  - Anamta Ali
दरून-ए-दिलजोचराग़जलतेरहेमुसलसल
हैंउनसेआँखोंमेंनूरकेसिलसिलेमुसलसल
कहींपेमरतेहैंभूकसेकुछयतीमबच्चे
कहींपेकासेहैंसाइलोंकेभरेमुसलसल
मिरीउदासीपेइसतरहतूउदासमतहो
किज़ख़्मरहतेनहींहैंअक्सरहरेमुसलसल
वोख़्वाबआँखोंमेंभरसकेयाउन्हेंगँवादे
वोअपनेडरपेतोबातखुलकरकरेमुसलसल
कभीख़ुशीमेंभीअश्कआँखोंमेंगएऔर
कहींउदासीमेंमुस्कुरानापड़ेमुसलसल
येउसकीज़िदमें'अनमता'नींदोंसेलड़पड़ीथीं
हमअपनीआँखोंसेदेरतकशबलड़ेमुसलसल
  - Anamta Ali
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