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Ammar Iqbal
teergii taq men ja
teergii taq men ja | तीरगी ताक़ में जड़ी हुई है
- Ammar Iqbal
तीरगी
ताक़
में
जड़ी
हुई
है
धूप
दहलीज़
पर
पड़ी
हुई
है
दिल
पे
नाकामियों
के
हैं
पैवंद
आस
की
सोई
भी
गड़ी
हुई
है
मेरे
जैसी
है
मेरी
परछाईं
धूप
में
पल
के
ये
बड़ी
हुई
है
घेर
रक्खा
है
ना-रसाई
ने
और
ख़्वाहिश
वहीं
खड़ी
हुई
है
मैं
ने
तस्वीर
फेंक
दी
है
मगर
कील
दीवार
में
गड़ी
हुई
है
हारता
भी
नहीं
ग़म-ए-दौराँ
ज़िद
पे
उम्मीद
भी
अड़ी
हुई
है
दिल
किसी
के
ख़याल
में
है
गुम
रात
को
ख़्वाब
की
पड़ी
हुई
है
- Ammar Iqbal
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ये
हवा
सारे
चराग़ों
को
उड़ा
ले
जाएगी
रात
ढलने
तक
यहाँ
सब
कुछ
धुआँ
हो
जाएगा
Naseer Turabi
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इसी
खंडर
में
कहीं
कुछ
दिए
हैं
टूटे
हुए
इन्हीं
से
काम
चलाओ
बड़ी
उदास
है
रात
Firaq Gorakhpuri
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रात
बेचैन
सी
सर्दी
में
ठिठुरती
है
बहुत
दिन
भी
हर
रोज़
सुलगता
है
तिरी
यादों
से
Amit Sharma Meet
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इक
ओर
तेरा
ख़्वाब
जो
हर
रात
आता
है
दूजा
वो
अपना
वस्ल
जो
हो
ही
नहीं
रहा
Aqib khan
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दिन
ढल
गया
और
रात
गुज़रने
की
आस
में
सूरज
नदी
में
डूब
गया,
हम
गिलास
में
Rahat Indori
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तन्हाई
के
हुजूम
में
वो
एक
तेरी
याद
जैसे
अँधेरी
रात
में
जलता
हुआ
दिया
Sagheer Lucky
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रात
भर
उन
का
तसव्वुर
दिल
को
तड़पाता
रहा
एक
नक़्शा
सामने
आता
रहा
जाता
रहा
Akhtar Shirani
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बदल
जाएँगे
ये
दिन
रात
'अजमल'
कोई
ना-मेहरबाँ
कब
तक
रहेगा
Ajmal Siraj
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नींद
भी
जागती
रही
पूरे
हुए
न
ख़्वाब
भी
सुब्ह
हुई
ज़मीन
पर
रात
ढली
मज़ार
में
Adil Mansuri
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किताबें,
रिसाले
न
अख़बार
पढ़ना
मगर
दिल
को
हर
रात
इक
बार
पढ़ना
Bashir Badr
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आखिरश
पाक
हो
गया
क़िस्सा
ख़ाक
था
ख़ाक
हो
गया
क़िस्सा
खा
रहा
है
जने
हुए
अपने
कितना
सफ़्फ़ाक
हो
गया
क़िस्सा
अब
बचा
हूँ
मैं
आख़िरी
किरदार
अब
खतरनाक
हो
गया
क़िस्सा
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Ammar Iqbal
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उसने
नासूर
कर
लिया
होगा
ज़ख़्म
को
शाएरी
बनाते
हुए
Ammar Iqbal
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जाओ
मातम
गुज़ारो
जाने
दो
जिस
का
ग़म
है
उसे
मनाने
दो
बीच
से
एक
दास्ताँ
टूटी
और
फिर
बन
गए
फ़साने
दो
हम
फ़क़ीरों
को
कुछ
तो
दो
साहब
कुछ
नहीं
दे
सको
तो
ता'ने
दो
हाथ
जिस
को
लगा
नहीं
सकता
उस
को
आवाज़
तो
लगाने
दो
तुम
दिया
हो
तो
उन
पतंगों
को
कम
से
कम
रौशनी
में
आने
दो
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Ammar Iqbal
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नज़र
से
तुम
को
मिले
न
कोई
सुराग़
दिल
का
झुका
के
गर्दन
बुझा
लिया
है
चराग़
दिल
का
सुनूँ
न
कैसे
करूँँ
न
क्यूँँकर
मैं
अपने
दिल
की
मेरे
अलावा
है
कौन
इस
बद-दिमाग़
दिल
का
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Ammar Iqbal
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मैंने
तस्वीर
फेंक
दी
है
मगर
कील
दीवार
में
गड़ी
हुई
है
Ammar Iqbal
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