kitna mukhtasar hai ye zindagi ka afsaana | कितना मुख़्तसर है ये ज़िंदगी का अफ़्साना

  - Amjad Najmi
कितनामुख़्तसरहैयेज़िंदगीकाअफ़्साना
एकगाम-ए-मर्दानाएकरक़्स-ए-मस्ताना
तूहीएकशाकीहैज़ौक़-ए-तिश्ना-कामीका
ग़र्क़-ए-मौज-ए-सहबाहैजबकिसारामय-ख़ाना
बसयहीहैलेदेकेदूरी-ए-रह-ए-मंज़िल
दोक़दमदिलेरानादोक़दमशिताबाना
हक़तुझेहैक्याहासिलज़ेर-ए-चर्ख़जीनेका
हादसात-ए-आलमसेतूअगरहैबेगाना
दिलनहींवोसीनेमेंएकसंग-ए-ख़ाराहै
होजिसमेंपोशीदाआह-ए-दर्द-मंदाना
येभीएकधोकाहैदीदा-ए-ग़लत-बींका
वर्नाकौनदीवानाऔरकौनफ़रज़ाना
गाहगाहलड़तारहअक़्ल-ए-मस्लहत-बींसे
गाहगाहलेताजाहाथमेंभीपैमाना
  - Amjad Najmi
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