apni hasti ko yahaañ be-muddaa samjha tha main | अपनी हस्ती को यहाँ बे-मुद्दआ समझा था मैं

  - Amjad Najmi
अपनीहस्तीकोयहाँबे-मुद्दआसमझाथामैं
क्यासमझनाचाहिएथाऔरक्यासमझाथामैं
तुमकोअपनेदर्द-ए-दिलकीगरदवासमझाथामैं
क्याग़लतसमझाथामैंबिल्कुलबजासमझाथामैं
किसग़लत-फ़हमीमेंअपनीउम्रसारीकटगई
इकवफ़ा-ना-आश्नाकोबा-वफ़ासमझाथामैं
कुछपूछोराह-ए-उल्फ़तमेंमिरीवामांदगी
काकुल-ए-पेचीदाकोज़ंजीर-ए-पासमझाथामैं
उसकाहरहरघूँटथाज़हर-ए-हलाहलसेसिवा
ज़िंदगीकोचश्मा-ए-आब-ए-बक़ासमझाथामैं
सचहै'नजमी'इश्क़अज़ींबिसयारकरदस्त-ओ-कुनद
सरकादेनाएकआईन-ए-वफ़ासमझाथामैं
  - Amjad Najmi
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