bulbul-e-rangeen-nava KHaamosh hai | बुलबुल-ए-रंगीं-नवा ख़ामोश है

  - Amjad Najmi
बुलबुल-ए-रंगीं-नवाख़ामोशहै
बाग़कीसारीफ़ज़ाख़ामोशहै
गुलखिलाएउसनेक्याक्याबाग़में
फिरभीकिसदर्जासबाख़ामोशहै
आरज़ूजिनकीथीमुझकोमिलगए
अबज़बान-ए-इल्तिजाख़ामोशहै
बे-कसीयेकिसनेलीतेरीपनाह
गोरकाकिसकीदियाख़ामोशहै
शोरिश-ए-दिलशोरिश-ए-महशरनहीं
ज़िंदगीअपनीभीक्याख़ामोशहै
सोचतीहैजाकेयेबरसेकहाँ
मेरेअश्कोंकीघटाख़ामोशहै
किसकोजीनेकीतमन्नाहैयहाँ
क्यूँँलब-ए-मोजिज़-नुमाख़ामोशहै
हुस्न-ए-दिलकशकाभीक्याअंदाज़है
नाज़गोयाहैअदाख़ामोशहै
हैयहाँ'नजमी'उसीकाशोर-ओ-ग़ुल
गोब-ज़ाहिरवोसदाख़ामोशहै
  - Amjad Najmi
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