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Daqiiq Jabaali
pahle jaisi sukoon kii raat nahin hoti hai
pahle jaisi sukoon kii raat nahin hoti hai | पहले जैसी सुकूँ की रात नहीं होती है
- Daqiiq Jabaali
पहले
जैसी
सुकूँ
की
रात
नहीं
होती
है
मेरी
अब
उन
सेे
कोई
बात
नहीं
होती
है
- Daqiiq Jabaali
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शब
भर
इक
आवाज़
बनाई
सुब्ह
हुई
तो
चीख़
पड़े
रोज़
का
इक
मामूल
है
अब
तो
ख़्वाब-ज़दा
हम
लोगों
का
Abhishek shukla
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कम
अज़
कम
इक
ज़माना
चाहता
हूँ
कि
तुम
को
भूल
जाना
चाहता
हूँ
ख़ुदारा
मुझ
को
तन्हा
छोड़
दीजे
मैं
खुल
कर
मुस्कुराना
चाहता
हूँ
सरासर
आप
हूँ
मद्दे
मुक़ाबिल
ख़ुदी
ख़ुद
को
हराना
चाहता
हूँ
मेरे
हक़
में
उरूस-ए-शब
है
मक़्तल
सो
उस
से
लब
मिलाना
चाहता
हूँ
ये
आलम
है,
कि
अपने
ही
लहू
में
सरासर
डूब
जाना
चाहता
हूँ
सुना
है
तोड़ते
हो
दिल
सभों
का
सो
तुम
से
दिल
लगाना
चाहता
हूँ
उसी
बज़्म-ए-तरब
की
आरज़ू
है
वही
मंज़र
पुराना
चाहता
हूँ
नज़र
से
तीर
फैंको
हो,
सो
मैं
भी
जिगर
पर
तीर
खाना
चाहता
हूँ
चराग़ों
को
पयाम-ए-ख़ामुशी
दे
तेरे
नज़दीक
आना
चाहता
हूँ
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Kazim Rizvi
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बदन
लिए
तलाशता
फिरू
हूँ
रात
दिन
उसे
सुना
है
जान
भी
मेरी
कहीं
इसी
शहर
में
है
Bhaskar Shukla
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रात
बाक़ी
थी
जब
वो
बिछड़े
थे
कट
गई
उम्र
रात
बाक़ी
है
Khumar Barabankvi
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जब
तुझे
याद
कर
लिया
सुब्ह
महक
महक
उठी
जब
तेरा
ग़म
जगा
लिया
रात
मचल
मचल
गई
Faiz Ahmad Faiz
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कब
ठहरेगा
दर्द
ऐ
दिल
कब
रात
बसर
होगी
सुनते
थे
वो
आएँगे
सुनते
थे
सहर
होगी
Faiz Ahmad Faiz
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रात
का
इंतिज़ार
कौन
करे
आज
कल
दिन
में
क्या
नहीं
होता
Bashir Badr
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बिगड़
गई
थी
जो
दुनिया
सॅंवार
दी
हमने
चढ़ा
के
सर
पे
मुहब्बत
उतार
दी
हमने
अँधेरी
रात
किसी
बे-वफ़ा
की
यादों
में
बहुत
तवील
थी
लेकिन
गुज़ार
दी
हमने
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Hameed Sarwar Bahraichi
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कल
चौदहवीं
की
रात
थी
शब
भर
रहा
चर्चा
तिरा
कुछ
ने
कहा
ये
चाँद
है
कुछ
ने
कहा
चेहरा
तिरा
Ibn E Insha
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शब
जो
होली
की
है
मिलने
को
तिरे
मुखड़े
से
जान
चाँद
और
तारे
लिए
फिरते
हैं
अफ़्शाँ
हाथ
में
Mushafi Ghulam Hamdani
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हर
दिन
ख़ुद
से
लड़ता
हूँ
ख़ुद
का
ही
दुश्मन
हूँ
मैं
Daqiiq Jabaali
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इस
क़दर
बीती
है
तन्हा
ये
ज़िन्दगी
छोड़
जाए
कोई
तो
ख़ुशी
होती
है
Daqiiq Jabaali
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क्या
है
कि
अपने
आप
में
मग़रूर
है
बहुत
वो
शख़्स
हम
से
इस
लिए
तो
दूर
है
बहुत
हम
को
हमारा
कूचा
भी
पहचानता
नहीं
और
वो
कि
अपने
शहर
में
मशहूर
है
बहुत
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Daqiiq Jabaali
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इक
दिन
कहा
उसने
लिखो
कुछ
मुझ
पे
तुम
फिर
क्या
‘अमित’
उस
दिन
से
शायर
हो
गया
Daqiiq Jabaali
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सारी
दुनिया
का
भला
मैं
क्या
करूँँगा
मुझको
तो
वो
एक
लड़की
चाहिए
बस
Daqiiq Jabaali
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