शहर-ए-ग़म में बसा करे कोई

  - Amit Nandan Dev
शहर-ए-ग़ममेंबसाकरेकोई
हम-सफ़रगरमिलाकरेकोई
बे-नियाज़ीकोहैयेदाएमीशौक़
दुश्मनीसेवफ़ाकरेकोई।
देखकरख़ाक-ए-आशियाँमेरा
हँसरहाहैदु'आकरेकोई
क़त्लपरभीख़ुशीमनालेना
ऐसीरस्मेंअदाकरेकोई
ज़ख़्म-ए-दिलपरख़िज़ाँकासायाहै
फूलकैसेखिलाकरेकोई
ज़िंदगीएकक़ैदलगतीहै
कैसेइससेरिहाकरेकोई
अबतोजीनेकाहौसलाहीनहीं
कोईआएजफ़ाकरेकोई
तिश्नगीख़ुदतमामकरतीहै
इश्क़किससेेवफ़ाकरेकोई
गुफ़्तुगूमेंभीइम्तिहाँमेरा
क्याकहाऔरसुनाकरेकोई
रूहपरभीअसरनहींहोता
साँसलेयाफ़नाकरेकोई
हमनेदेखाहैअपनेहाथोंको
अबभलाक्याख़ुदाकरेकोई
जबहोमेहरबाँख़ुदाहीअगर
किससेेआस-ए-दुआकरेकोई
अबतोदेवअपनेअश्कपीलेना
बार-ए-रबक्यूँँगिलाकरेकोई
  - Amit Nandan Dev
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy