जला के ख़्वाब सभी अश्क-ए-बे-शुमार चले

  - Amit Nandan Dev
जलाकेख़्वाबसभीअश्क-ए-बे-शुमारचले
किदिलकीआगसेरौशनयेरहगुज़ारचले
जोतेरीयादसेरौशनथाइकज़मानाकभी
उसीचराग़सेअबख़ाकतकबहारचले
हमींनेज़ख़्मसिएऔरहमींपेजुर्मभीथा
सबासकहदोबेज़ारइसक़रारचले
वोलिखरहाथालहूसेसुराग़-ए-रहमत-ए-दिल
किदेवबनकेख़ुदातकयेइंतिज़ारचले
क़दमतोदेखिएकैसेउठारहाथावो
जोअपनेआपसेबेगानाबार-बारचले
किमैंतोख़ाकथामेरीहीरूहबोलउठी
अगरयेशे'रहैतोरबहैदेवयारचले
नसीब-ए-शहरमेंजुगनूनहींबचेशायद
चलोकिचाँदहीलाएँकोईग़ुबारचले
कभीजोसोचाथाइकरोज़लौटआएगा
वहीफ़रेबलिएआजफिरशिकारचले
सफ़रकीख़ाकसेइकरूहबनगईशायद
वोरूहअश्कबनीऔरख़्वाब-दारचले
  - Amit Nandan Dev
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