लफ़्ज़ों को पहले आप तराज़ू में तोलिए

  - Amit Nandan Dev
लफ़्ज़ोंकोपहलेआपतराज़ूमेंतोलिए
फिरउसकेबादज़ख़्म-ए-निहाँलबसेखोलिए
साएकोहम-सफ़रजोसमझबैठेथेयहाँ
सूरजढलातोख़ुदकोअँधेरोंमेंखोलिए
कहनेकोहमभीसाहिब-ए-अक़्ल-ओ-शऊरथे
दीवानगीकीभीड़मेंशामिलजोहोलिए
मंज़िलसमझकेबैठगएराहमेंजहाँ
साएघनेदरख़्तकेदेखेतोसोलिए
लफ़्ज़ोंमेंसादगीकाभरमअबनहींरहा
बेहतरहैगुफ़्तगूमेंइशारोंसेबोलिए
सहरा-ए-ज़िंदगानीमेंहमनेभीदोस्तो
काँटेउगाएदर्दकेपौधेभीबोलिए
दीवानगीमें'देव'बड़ालुत्फ़थाहमें
दानाहुएतोअपनीसमझकोहीरोलिए
  - Amit Nandan Dev
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy