सबास कह दो कि मंज़िल का कुछ पता लाए

  - Amit Nandan Dev
सबासकहदोकिमंज़िलकाकुछपतालाए
हवाकीगोदमेंबिखरेहैंजोदियालाए
हमारीआँखसेबरसीहैजोसहरकीलकीर
उसेसमेटकेमहफ़िलमेंआइनालाए
उसेख़बरहैकिबस्तीतमामवीराँहै
मगरयेचाहकिरस्ताभीख़ुदबनालाए
कभीतोवक़्तकामाज़ीबदलसकेकोई
कभीतोकोईपुरानीख़ुशीसदालाए
चलेजोकू-ए-सलासिलतोग़मकीसरहदतक
ग़ुलाम-ए-दर्दथेज़ंजीरहमवफ़ालाए
वोदिनकिजबसर-ए-आलमफ़ुग़ाँसहरहोगा
हमअपनीख़ाकसेइकबाग़फिरखिलालाए
जोदर्दरखतेहैंसीनेमेंनग़्मा-वारअली
उन्हींकेहाथमेंपत्थरभीअबदु'आलाए
जलाकेरूहकीतहरीर'देव'चलदेगा
किअबख़ुदाभीमुक़द्दरनयालिखालाए
मक़ामक्याहैयहीसोचकरक़दमरखिये
कभीतोकोईज़मानाहमेंवफ़ालाए
  - Amit Nandan Dev
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