मत कहो राज़-ए-गुफ़्तगू बेक़सों को सुनाए क्यूँँ

  - Amit Nandan Dev
मतकहोराज़-ए-गुफ़्तगूबेक़सोंकोसुनाएक्यूँँ
बंदलबोंकीसादगीचश्ममेंभरआएक्यूँँ
हमनेबुनाहैख़्वाबकोसाज़-ए-सितमसेबारहा
अबजोवोटूटजाएतोशोरयेफिरउठाएक्यूँँ
शहरथागर्द-ए-वहममेंज़िक्रथानाम-ए-बे-सबब
हमकोवहाँभुलादियायादहमींफिरआएक्यूँँ
रंग-ए-फ़िराक़शोला-ए-ज़ौक़अज़ाब-ए-बे-सबात
दिलकोलगेजोआगवोअश्कसेफिरबुझाएक्यूँँ
हमजोबचेथेवक़्तसेख़ुदसेमगरबचसके
ज़ख़्मअगरहैंअपनेतोऔरकोईदिखाएक्यूँँ
रूहपेलिखदियागयाहर्फ़-ए-गुनाहबे-वजह
हमनेजोख़्वाबदेखाथाअबवोख़ुदाबनाएक्यूँँ
'देव'नेराखचूमलीशम्सकोफिरजलायाक्यूँँ
तख़्त-ए-वजूदपरथाजोख़्वाबमेंभीआएक्यूँँ
हुस्नमेंथेगुनाहभीइश्क़मेंतर्जुमाभीथा
हमकोहीइल्मथामगरहमहीसमझपाएक्यूँँ
ख़ाकहैउससलीबकीजोश-ए-दुआसेदूरहै
जोभीमिलाख़ुदावहाँलौटकेभीआएक्यूँँ
'देव'नेख़ूनसेलिखीतर्ज़-ए-सुख़नकीदास्ताँ
अबकोईऔरलिखसकेऐसाफ़सानाआएक्यूँँ
  - Amit Nandan Dev
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