ghubaar-e-dil ko uthaata hooñ aur dekhta hooñ | ग़ुबार-ए-दिल को उठाता हूँ और देखता हूँ

  - Amit Nandan Dev
ग़ुबार-ए-दिलकोउठाताहूँऔरदेखताहूँ
कोईनक़ाबहटाताहूँऔरदेखताहूँ
बहुतदिनोंसेवोआईनहींनिगाहोंमें
मैंशीशारोज़उठाताहूँऔरदेखताहूँ
बिछड़नेवालाजोकहताथालौटआऊँगा
मैंदरपेदीपजलाताहूँऔरदेखताहूँ
नसीबमेंतोनहींनामलेताहूँफिरभी
मैंउसकोख़्वाबमेंलाताहूँऔरदेखताहूँ
तअल्लुक़ातकीमिट्टीहैसूखीसूखीसी
मैंउसपेअश्क़गिराताहूँऔरदेखताहूँ
कभीकभीतोयेलगताहैदिलनहींबाक़ी
मैंअपनीनब्ज़दबाताहूँऔरदेखताहूँ
जोरूह-ओ-जिस्मसेआगेकाएकआलमहै
मैंआँखमूँदकेजाताहूँऔरदेखताहूँ
ज़मानाकहताहैअबकुछनहींबचाबाक़ी
मैंएकआसजलाताहूँऔरदेखताहूँ
वोमेरेशे'रकोसुनकरभीमुस्कुरातीनहीं
मैंफिरभीरोज़सुनाताहूँऔरदेखताहूँ
नतीजाकुछनहींआतादु'आओंसे'देव'अब
मैंहाथफिरभीउठाताहूँऔरदेखताहूँ
  - Amit Nandan Dev
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