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Amit Kumar
ho gaii hai yaar had ab bebasi kii
ho gaii hai yaar had ab bebasi kii | हो गई है यार हद अब बेबसी की
- Amit Kumar
हो
गई
है
यार
हद
अब
बेबसी
की
कोई
ख़्वाहिश
है
नहीं
इस
ज़िंदगी
की
है
ज़रूरत
सबको
ही
सब
की
यहाँ
पर
पर
कोई
सुनता
कहाँ
है
अब
किसी
की
सूनी
सी
दुनिया
लगे
तो
मान
लेना
दो
क़दम
ही
दूर
है
मंज़िल
ख़ुशी
की
ज़ेहन
में
आ
के
वो
मेरे
झूमता
है
कितनी
यादें
अच्छी
है
अब
मयकशी
की
अपनी
करतूतों
से
ही
डर
जाए
जो
रख
दे
हक़ीक़त
सामने
अब
आदमी
की
- Amit Kumar
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वरना
तो
ये
दीवार-ओ-दर
लगता
है
तुम
होती
हो
घर
में
तो
घर
लगता
है
Bhaskar Shukla
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सखियों
संग
रँगने
की
धमकी
सुनकर
क्या
डर
जाऊँगा
तेरी
गली
में
क्या
होगा
ये
मालूम
है
पर
आऊँगा
Kumar Vishwas
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दिल
को
तेरी
चाहत
पे
भरोसा
भी
बहुत
है
और
तुझ
से
बिछड़
जाने
का
डर
भी
नहीं
जाता
Ahmad Faraz
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मुझे
अब
तुम
से
डर
लगने
लगा
है
तुम्हें
मुझ
से
मोहब्बत
हो
गई
क्या
Jaun Elia
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तीर
पर
तीर
लगाओ
तुम्हें
डर
किस
का
है
सीना
किस
का
है
मिरी
जान
जिगर
किस
का
है
Ameer Minai
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ज़िंदगी
मेरी
मुझे
क़ैद
किए
देती
है
इस
को
डर
है
मैं
किसी
और
का
हो
सकता
हूँ
Azm Shakri
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इस
दर
का
हो
या
उस
दर
का
हर
पत्थर
पत्थर
है
लेकिन
कुछ
ने
मेरा
सर
फोड़ा
हैं
कुछ
पर
मैं
ने
सर
फोड़ा
है
Zubair Ali Tabish
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रातें
किसी
याद
में
कटती
हैं
और
दिन
दफ़्तर
खा
जाता
है
दिल
जीने
पर
माएल
होता
है
तो
मौत
का
डर
खा
जाता
है
सच
पूछो
तो
'तहज़ीब
हाफ़ी'
मैं
ऐसे
दोस्त
से
आज़िज़
हूँ
मिलता
है
तो
बात
नहीं
करता
और
फोन
पे
सर
खा
जाता
है
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Tehzeeb Hafi
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गुज़ार
देते
हैं
रातें
पहलू
में
उसके
जुगनू
को
भी
दर
का
फ़क़ीर
बना
रखा
है
ALI ZUHRI
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तो
क्या
उसको
मैं
होंठों
से
बजाऊँ
तिरे
दर
पे
जो
घंटी
लग
गई
है
चराग़
उसने
मिरे
लौटा
दिए
हैं
अब
उसके
घर
में
बिजली
लग
गई
है
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Fahmi Badayuni
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वो
रूठ
कर
गया
मुझ
सेे
ऐसे
एक
दिन
की
जैसे
था
ही
नहीं
वो
तो
मेरे
दस्तरस
में
Amit Kumar
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कोई
बिछड़ा
नहीं
है
किसी
से
यहाँ
जिनको
जिनका
था
होना
वो
बस
हो
गए
Amit Kumar
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मेरे
अंदर
जब
तलक
ये
दिल
नहीं
था
भूलना
मेरे
लिए
मुुश्किल
नहीं
था
उसको
महबूबास
ज़्यादा
चाहा
मैंने
दोस्ती
भर
के
भी
जो
क़ाबिल
नहीं
था
उम्र
भर
आते
रहे
हैं
ख़्वाब
उसके
ज़िंदगी
में
जो
मुझे
हासिल
नहीं
था
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Amit Kumar
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यही
तो
है
बस
कशमकश
ज़िन्दगी
की
कमी
पूरी
होती
नहीं
है
किसी
की
नज़र
आया
मरते
हुए
घर
का
चेहरा
अभी
है
बची
ज़िंदगी
ख़ुद-कुशी
की
अमीरों
के
घर
कोई
भूका
मरे
अब
है
लिखनी
कहानी
मुझे
मुफ़लिसी
की
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Amit Kumar
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उसने
बस
ऐसे
ही
कह
दिया
मिलते
हैं
और
मुझ
को
लगा
था
कि
सब
ठीक
है
Amit Kumar
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