aashnaai kabhi apni bhi thii do chaar ke saath | आशनाई कभी अपनी भी थी दो चार के साथ

  - Amit Gautam
आशनाईकभीअपनीभीथीदोचारकेसाथ
महफ़िलोंमेंजोबुलातेबड़ेइसरारकेसाथ
हमनेउनकोहैरखादिलमेंसजाकरऐसे
जैसेतस्वीरलगादेकोईदीवारकेसाथ
शहरकाएकहीअख़बारजोसचबोलताथा
हाथउसनेभीमिलायाहुआसरकारकेसाथ
औरदेताहैतोदेदर्द-ए-मुहब्बतज़ालिम
लुत्फ़आताहैमुझेजीनेमेंआज़ारकेसाथ
कलतलकजिसकोसिखायाथापकड़नाछूरी
मुझकोहीकाटरहाहैवोबड़ेप्यारकेसाथ
बापकीपगड़ीकीभीशानतुझेहैरखनी
इज़्ज़त-ए-नफ़्सजुड़ाहैमियाँदस्तारकेसाथ
पिछलीसर्दीमेंथीशादीमेरीमहबूबाकी
फूलभीलेगयाथामैंवहाँउपहारकेसाथ
मुझकोयेइल्महैवोअबभीहैदुश्मनमेरा
फूलक्यूँलायाहैफिरयारवोतलवारकेसाथ
आपकीबज़्ममेंआनाथातोयारोहमने
येग़ज़लपेशकीहैताज़ेसेअश'आरकेसाथ
  - Amit Gautam
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