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Amit Maulik
kisi din rang laayeingi tumhaari koshishein kah kar
kisi din rang laayeingi tumhaari koshishein kah kar | किसी दिन रंग लाएँगी तुम्हारी कोशिशें कह कर
- Amit Maulik
किसी
दिन
रंग
लाएँगी
तुम्हारी
कोशिशें
कह
कर
पिता
टूटे
कलेजे
में
कलेजा
डाल
देते
हैं
- Amit Maulik
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ग़ैर
से
खेली
है
होली
यार
ने
डाले
मुझ
पर
दीदा-ए-ख़ूँ-बार
रंग
Imam Bakhsh Nasikh
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कैसा
मुझ
को
बना
दिया
'अम्मार'
कौन
सा
रंग
भर
गए
मुझ
में
Ammar Iqbal
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भुला
दो
रंग
नफ़रत
के
,
तिरंगा
हाथ
में
लेकर
दिखा
दो
तीन
रंगों
का
सभी
को
प्यार
होली
में
Vijay Anand Mahir
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ये
भी
इक
रंग
है
शायद
मिरी
महरूमी
का
कोई
हँस
दे
तो
मोहब्बत
का
गुमाँ
होता
है
Ghulam Mohammad Qasir
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मत
पूछ
कि
क्या
हाल
है
मेरा
तेरे
पीछे
तू
देख
कि
क्या
रंग
है
तेरा,
मेरे
आगे
Mirza Ghalib
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दोनों
हाथों
को
तेरे
हाथ
समझ
कर
जानाँ
अपने
गालों
पे
ख़ुद
ही
रंग
लगाया
मैंने
Upendra Bajpai
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रंग
सारे
फीके
फीके
ही
लगेंगे
मुझको
अब
उनकी
आँखों
का
जो
काला
सुर्मा
देखा
है
अभी
Harsh saxena
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गले
मुझ
को
लगा
लो
ऐ
मेरे
दिलदार
होली
में
बुझे
दिल
की
लगी
भी
तो
ऐ
मेरे
यार
होली
में
गुलाबी
गाल
पर
कुछ
रंग
मुझ
को
भी
जमाने
दो
मनाने
दो
मुझे
भी
जान-ए-मन
त्यौहार
होली
में
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Bhartendu Harishchandra
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रंग
बदला
यार
ने
वो
प्यार
की
बातें
गईं
वो
मुलाक़ातें
गईं
वो
चाँदनी
रातें
गईं
Hafeez Jalandhari
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दफ्न
ताबूत
में
कर
तिरी
हर
ख़ुशी
जश्न
कैसे
मनाते
है
मय्यत
पे
भी
ख़ास
तारीख़
थी
इम्तिहाँ
की
मगर
आज
बारात
उसकी
बुला
ली
गई
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Shilpi
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गुज़िश्ता
दौर
के
सारे
यहाँ
फ़रहाद
बैठे
हैं
मुहब्बत
देख
ली
करके
सभी
बर्बाद
बैठे
हैं
अभी
नादान
हो
प्यारे
यहाँ
पर
इल्म
मत
बाँटो
यहाँ
जितने
भी
बैठे
है
सभी
उस्ताद
बैठे
हैं
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Amit Maulik
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वो
फ़रिश्तों
से
कहीं
कम
नहीं
होते
साहिब
जिनको
लगता
है
ज़माने
को
हँसाना
अच्छा
Amit Maulik
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खुली
आँखें
रखो
इन
कैमरों
में
क्या
रखा
यारों
मशीनों
की
नज़र
से
असली
मंज़र
चूक
जाते
हैं
Amit Maulik
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ज़बान
ऐसी
कोई
बे-ईमान
देता
है
यहाँ
किसी
के
लिए
कौन
जान
देता
है
Amit Maulik
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हुकूमत
करने
वाली
तिश्नगी
को
रोक
रक्खा
है
कहीं
कोई
तो
है
जिसने
घड़ी
को
रोक
रक्खा
है
न
जाने
कब
का
हो
जाता
ख़ुदा
इंसान
दुनिया
का
कोई
तो
है
कि
जिसने
आदमी
को
रोक
रक्खा
है
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Amit Maulik
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