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Amit Maulik
zabaan aisi koi be-iimaan deta hai
zabaan aisi koi be-iimaan deta hai | ज़बान ऐसी कोई बे-ईमान देता है
- Amit Maulik
ज़बान
ऐसी
कोई
बे-ईमान
देता
है
यहाँ
किसी
के
लिए
कौन
जान
देता
है
- Amit Maulik
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रहते
थे
कभी
जिन
के
दिल
में
हम
जान
से
भी
प्यारों
की
तरह
बैठे
हैं
उन्हीं
के
कूचे
में
हम
आज
गुनहगारों
की
तरह
Majrooh Sultanpuri
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ज़्यादा
मीठा
हो
तो
चींटा
लग
जाता
है
सच्चे
इश्क़
को
अक्सर
बट्टा
लग
जाता
है
हमने
अपनी
जान
गंवाई
तब
जाना
भाव
मिले
तो
कुछ
भी
सट्टा
लग
जाता
है
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Ritesh Rajwada
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चाहे
हो
आसमान
पे
चाहे
ज़मीं
पे
हो
वहशत
का
रक़्स
हम
ही
करेंगे
कहीं
पे
हो
दिल
पर
तुम्हारे
नाम
की
तख़्ती
लगी
न
थी
फिर
भी
ज़माना
जान
गया
तुम
यहीं
पे
हो
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Nirmal Nadeem
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तेरा
पीछा
करते
करते
जाने
क्यूँ
मैं
दुनियादारी
से
पीछे
छूट
गया
तूने
तो
ऐ
जान
महज़
दिल
तोड़ा
था
तू
क्या
जाने
मैं
अंदर
तक
टूट
गया
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Ritesh Rajwada
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चढ़ते
हुवे
ए
शम्स
दिखा
ताव
भी
मगर
ये
जान
ले
कि
शाम
ढले
डूब
जाएगा
Afzal Ali Afzal
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ये
नहीं
है
कि
वो
एहसान
बहुत
करता
है
अपने
एहसान
का
एलान
बहुत
करता
है
आप
इस
बात
को
सच
ही
न
समझ
लीजिएगा
वो
मेरी
जान
मेरी
जान
बहुत
करता
है
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Jawwad Sheikh
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ये
तेरे
ख़त
ये
तेरी
ख़ुशबू
ये
तेरे
ख़्वाब-ओ-ख़याल
मता-ए-जाँ
हैं
तेरे
कौल
और
क़सम
की
तरह
गुज़िश्ता
साल
मैंने
इन्हें
गिनकर
रक्खा
था
किसी
ग़रीब
की
जोड़ी
हुई
रक़म
की
तरह
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Jaun Elia
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पत्थर
के
ख़ुदा
पत्थर
के
सनम
पत्थर
के
ही
इंसाँ
पाए
हैं
तुम
शहर-ए-मोहब्बत
कहते
हो
हम
जान
बचा
कर
आए
हैं
Sudarshan Fakir
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मैंने
अपनी
ग़ज़लें
खारिज
कर
डाली
सोचो
मेरी
जान
तुम्हारा
क्या
होगा
Talib Toofani
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यूँँ
तो
रुस्वाई
ज़हर
है
लेकिन
इश्क़
में
जान
इसी
से
पड़ती
है
Fahmi Badayuni
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उन्हें
दुनिया
हमेशा
अपनी
पलकों
पर
बिठाती
है
जो
पुरखों
की
विरासत
को
कलेजे
से
लगाते
हैं
Amit Maulik
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गुज़िश्ता
दौर
के
सारे
यहाँ
फ़रहाद
बैठे
हैं
मुहब्बत
देख
ली
करके
सभी
बर्बाद
बैठे
हैं
अभी
नादान
हो
प्यारे
यहाँ
पर
इल्म
मत
बाँटो
यहाँ
जितने
भी
बैठे
है
सभी
उस्ताद
बैठे
हैं
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Amit Maulik
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किसी
दिन
रंग
लाएँगी
तुम्हारी
कोशिशें
कह
कर
पिता
टूटे
कलेजे
में
कलेजा
डाल
देते
हैं
Amit Maulik
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हुकूमत
करने
वाली
तिश्नगी
को
रोक
रक्खा
है
कहीं
कोई
तो
है
जिसने
घड़ी
को
रोक
रक्खा
है
न
जाने
कब
का
हो
जाता
ख़ुदा
इंसान
दुनिया
का
कोई
तो
है
कि
जिसने
आदमी
को
रोक
रक्खा
है
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Amit Maulik
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वो
फ़रिश्तों
से
कहीं
कम
नहीं
होते
साहिब
जिनको
लगता
है
ज़माने
को
हँसाना
अच्छा
Amit Maulik
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