diye ka rukh badalta ja raha hai | दिए का रुख़ बदलता जा रहा है

  - Amit Sharma Meet
दिएकारुख़बदलताजारहाहै
हवाकेसाथजलताजारहाहै
तुम्हारेहिज्रकीइसआँचमेंअब
हमारादिलपिघलताजारहाहै
तड़पउट्ठीहैमेरीरूहफिरसे
बदनसेतूनिकलताजारहाहै
निकालोअबमिरेघरसेहीमुझको
येसन्नाटानिगलताजारहाहै
क़फ़समेंक़ैदइकपंछीकेजैसे
मिराकिरदारढलताजारहाहै
हमाराहिज्रभीअबमसअलाबन
ज़मानेमेंउछलताजारहाहै
उसेएहसासहैक्या'मीत'वोअब
मिरेअरमाँकुचलताजारहाहै
  - Amit Sharma Meet
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