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Amit Satpal Tanwar
tumhaare lab pe naam aaya hamaara
tumhaare lab pe naam aaya hamaara | तुम्हारे लब पे नाम आया हमारा
- Amit Satpal Tanwar
तुम्हारे
लब
पे
नाम
आया
हमारा
उसी
से
नाम
भी
चमका
हमारा
घरों
से
निकले
थे
पगडंडियों
पर
सफ़र
में
मिल
गया
रस्ता
हमारा
जो
मेरा
ग़म
मिटा
सकता
था
यारों
उसी
ने
ग़म
नहीं
समझा
हमारा
- Amit Satpal Tanwar
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बहुत
क़रीब
रही
है
ये
ज़िन्दगी
हम
से
बहुत
अज़ीज़
सही
ए'तिबार
कुछ
भी
नहीं
Akhtar Saeed Khan
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यूँँ
ही
हमेशा
उलझती
रही
है
ज़ुल्म
से
ख़ल्क़
न
उनकी
रस्म
नई
है,
न
अपनी
रीत
नई
यूँँ
ही
हमेशा
खिलाए
हैं
हमने
आग
में
फूल
न
उनकी
हार
नई
है,
न
अपनी
जीत
नई
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Faiz Ahmad Faiz
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बर्बाद
कर
दिया
हमें
परदेस
ने
मगर
माँ
सब
से
कह
रही
है
कि
बेटा
मज़े
में
है
Munawwar Rana
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उसे
पागल
बनाती
फिर
रही
हो
जिसे
शौहर
बनाना
चाहिए
था
Arvind Inaayat
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इश्क़
अगर
बढ़ता
है
तो
फिर
झगड़े
भी
तो
बढ़ते
हैं
आमदनी
जब
बढ़ती
है
तो
ख़र्चे
भी
तो
बढ़ते
हैं
माना
मंज़िल
नहीं
मिली
है
हमको
लेकिन
रोज़ाना
एक
क़दम
उसकी
जानिब
हम
आगे
भी
तो
बढ़ते
हैं
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Tanoj Dadhich
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दिल
की
तमन्ना
थी
मस्ती
में
मंज़िल
से
भी
दूर
निकलते
अपना
भी
कोई
साथी
होता
हम
भी
बहकते
चलते
चलते
Majrooh Sultanpuri
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ज़हीफ़ी
इस
लिए
मुझको
सुहानी
लग
रही
है
इसे
कमाने
में
पूरी
जवानी
लग
रही
है
नतीजा
ये
है
कि
बरसों
तलाश-ए-ज़ात
के
बाद
वहाँ
खड़ा
हूँ
जहाँ
रेत
पानी
लग
रही
है
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Khalid Sajjad
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बंद
कमरा,
सर
पे
पंखा,
तीरगी
है
और
मैं
एक
लड़ाई
चल
रही
है
ज़िंदगी
है
औऱ
मैं
Shadab Asghar
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जिस
मौसम
में
भीगना
है
हम
दोनों
को
उस
मौसम
में
पूछ
रही
हो
छाता
है
Zubair Alam
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न
हम-सफ़र
न
किसी
हम-नशीं
से
निकलेगा
हमारे
पाँव
का
काँटा
हमीं
से
निकलेगा
Rahat Indori
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लाश
की
तरह
हो
चुका
हूँ
मैं
जाने
किस
तरह
जी
रहा
हूँ
मैं
ख़ुद
के
अंदर
ही
क़ैद
हो
बैठा
अपने
पिंजरे
में
ही
पड़ा
हूँ
मैं
सिर्फ़
यादें
मिलेंगी
कमरे
में
अब
यहाँ
से
चला
गया
हूँ
मैं
कौन
मुझ
को
घुमाता
रहता
है
किस
की
उँगली
पे
नाचता
हूँ
मैं
मैं
जो
मंज़िल
पे
ख़ुद
नहीं
पहुँचा
उसी
मंज़िल
का
रास्ता
हूँ
मैं
आँसू
मेरी
हँसी
उड़ाते
है
मुस्कुराहट
पे
रो
लिया
हूँ
मैं
ज़हर
यूँँ
ही
पिएगा
अब
मुझ
को
हुआ
यूँँ
ज़हर
पी
चुका
हूँ
मैं
रूह
से
कुछ
ख़रीदना
है
मुझे
जिस्म
को
साँसें
बेचता
हूँ
मैं
खो
दिया
रौशनी
में
अपना
वजूद
अब
अँधेरों
में
ढूँढता
हूँ
मैं
मेरे
पीछे
कोई
न
रोएगा
मौत
के
साथ
जा
रहा
हूँ
मैं
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कहने
वाले
कह
जाते
हैं
सहने
वाले
ढह
जाते
हैं
प्यासा
प्यास
बुझा
लेता
है
दरिया
प्यासे
रह
जाते
हैं
इतना
मत
रो
आँसू
के
साथ
ख़्वाब
भी
अक्सर
बह
जाते
हैं
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ख़ुद
की
ही
क़ुर्बानी
है
मुझ
को
ईद
मनानी
है
तौबा
तौबा
तौबा
हाए
इश्क़
बड़ा
मन-मानी
है
रस्ते
रस्ते
काँटे
हैं
कैसे
जान
बचानी
है
दरिया
दरिया
सूखा-पन
सब
की
आँखें
पानी
है
तेरे
इश्क़
की
हवा
चले
अपनी
ख़ाक
उड़ानी
है
मेरी
आँखें
चमक
उठी
वो
चेहरा
नूरानी
है
मेरे
पीछे
इक
लड़की
राधा
सी
दीवानी
है
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Amit Satpal Tanwar
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ये
सन्नाटा
है
मैं
हूँ
चाँदनी
में
मज़ा
भी
ख़ूब
है
आवारगी
में
लबों
पर
मुस्कुराहट
गाल
गीले
तिरा
ग़म
घुल
गया
मेरी
ख़ुशी
में
ज़रा
सी
देर
को
खिड़की
जो
खोले
फ़रिश्ते
घू
मेंगे
उस
की
गली
में
घड़ी
के
पैर
थकते
ही
नहीं
क्या
घड़ी
ईजाद
की
थी
किस
घड़ी
में
जो
मिट्टी
के
बनाए
थे
ख़ुदा
ने
ये
ऐसे
लोग
है
कूज़ा-गरी
में
जो
बुत-ख़ाने
में
तुझ
को
सोच
लें
तो
भटक
जाते
हैं
रस्ता
बंदगी
में
मिरी
पहली
मोहब्बत
तुम
थी
जानाँ
तुम्हें
ज़िंदा
रखूँगा
शाइ'री
में
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कुछ
ऐसे
वस्ल
की
रातें
गुज़ारी
है
मैं
ने
तमाम
शब
तेरी
सूरत
निहारी
है
मैं
ने
अभी
से
सारा
समुंदर
उछाल
मारता
है
अभी
तो
दरिया
में
कश्ती
उतारी
है
मैं
ने
ये
सारे
रस्ते
मुझे
खींचने
लगे
है
अब
कुछ
इतना
चीख़
के
मंज़िल
पुकारी
है
मैं
ने
तमाम-उम्र
तिरी
जुस्तुजू
रही
मुझ
को
तमाम-उम्र
सफ़र
में
गुज़ारी
है
मैं
ने
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