karb dar-parda-e-tarab hai abhii | कर्ब दर-पर्दा-ए-तरब है अभी

  - Amir Mausavi
कर्बदर-पर्दा-ए-तरबहैअभी
मुस्कुराहटभीज़ेर-ए-लबहैअभी
हैंपरेशाँहयातकेगेसू
करोज़िक्र-ए-सुब्हशबहैअभी
मिलतोसकताहैआदमीमेंख़ुदा
आदमीआदमीहीकबहैअभी
लाखसमझौतेहालसेकीजिए
थीग़ज़बयादइकग़ज़बहैअभी
किसक़दरकामयाबहैइंसाँ
भूकहीमौतकासबबहैअभी
ज़िंदगीतिश्नगीमेंथीसरशार
होकेसरशारतिश्ना-लबहैअभी
बज़्म-ए-इम्काँहैजुज़्व-ए-फ़िक्र-ओ-नज़र
अक़्ल-ए-कुलअक़्ल-ए-बुल-अजबहैअभी
इकहवसहैकिक़हक़हापरवाज़
इकमोहब्बतकिजाँ-ब-लबहैअभी
मिटगएफ़ासलेख़लाओंके
रंगहैनस्लहैनसबहैअभी
ख़ुद-नुमाईकेवहमकाइबहाम
नामकेसाथइकलक़बहैअभी
तुलरहीहैहयातहाथोंपर
फ़ाएलुनफ़ाएलुनअदबहैअभी
सबजोपायाहैआजकुछभीनहीं
कुछजोखोयाथाकलवोसबहैअभी
घरकेटिकसालकीमशीनोंमें
दिलकावोशोरवोशग़बहैअभी
हरनज़रइकसवालहै'आमिर'
हरनफ़सफै़सला-तलबहैअभी
  - Amir Mausavi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy