firaq-e-yaar ne bechain mujh ko raat bhar rakha | फ़िराक़-ए-यार ने बेचैन मुझ को रात भर रक्खा

  - Ameer Minai
फ़िराक़-ए-यारनेबेचैनमुझकोरातभररक्खा
कभीतकियाइधररक्खाकभीतकियाइधररक्खा
शिकस्त-ए-दिलकाबाक़ीहमनेग़ुर्बतमेंअसररखा
लिखाअहल-ए-वतनकोख़ततोइकगोशाकतररक्खा
बराबरआईनेकेभीसमझेक़द्रवोदिलकी
इसेज़ेर-ए-क़दमरक्खाउसेपेश-ए-नज़ररक्खा
मिटाएदीदा-ओ-दिलदोनोंमेरेअश्क-ए-ख़ूनींने
अजबयेतिफ़्लअबतरथाघररक्खादररक्खा
तुम्हारेसंग-ए-दरकाएकटुकड़ाभीजोहाथआया
अज़ीज़ऐसाकियामरकरउसेछातीपेधररक्खा
जिनाँमेंसाथअपनेक्यूँँलेजाऊँगानासेहको
सुलूकऐसाहीमेरेसाथहैहज़रतनेकररक्खा
कीकिसनेसिफ़ारिशमेरीवक़्त-ए-क़त्लक़ातिलसे
कमाँनेहाथजोड़ेतेग़नेक़दमोंपेसररक्खा
ग़ज़बबरसेवोमेरेआतेहीमालूमहोताहै
जगहख़ालीजोपाईयारकोग़ैरोंनेभररक्खा
बड़ाएहसाँहैमेरेसरपेउसकीलग़्ज़िश-ए-पाका
किइसनेबे-तहाशाहाथमेरेदोशपररक्खा
ज़मींमेंदाना-ए-गंदुमसदफ़मेंहमहुएगौहर
हमारेइज्ज़नेहरमअ'रकामेंहमकोदररक्खा
तिरेहरनक़्श-ए-पाकोरहगुज़रमेंसज्दा-गहसमझे
जहाँतूनेक़दमरक्खावहाँमैंनेभीसररक्खा
अमीरअच्छाशगून-ए-मयकियासाक़ीकीफ़ुर्क़तमें
जोबरसाअब्र-ए-रहमतजा-ए-मयशीशोंमेंभररक्खा
  - Ameer Minai
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