ai zabt dekh ishq ki un ko khabar na ho | ऐ ज़ब्त देख इश्क़ की उन को ख़बर न हो

  - Ameer Minai
ज़ब्तदेखइश्क़कीउनकोख़बरहो
दिलमेंहज़ारदर्दउठेआँखतरहो
मुद्दतमेंशाम-ए-वस्लहुईहैमुझेनसीब
दो-चारसालतकतोइलाहीसहरहो
इकफूलहैगुलाबकाआजउनकेहाथमें
धड़कामुझेयेहैकिकिसीकाजिगरहो
ढूँडेसेभीमअ'नी-ए-बारीकजबमिला
धोकाहुआयेमुझकोकिउसकीकमरहो
उल्फ़तकीक्याउम्मीदवोऐसाहैबे-वफ़ा
सोहबतहज़ारसालरहेकुछअसरहो
तूल-ए-शब-ए-विसालहोमिस्ल-ए-शब-ए-फ़िराक़
निकलेआफ़्ताबइलाहीसहरहो
  - Ameer Minai
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