main ro ke aah karunga jahaan rahe na rahe | मैं रो के आह करूँँगा जहाँ रहे न रहे

  - Ameer Minai
मैंरोकेआहकरूँँगाजहाँरहेरहे
ज़मींरहेरहेआसमाँरहेरहे
रहेवोजान-ए-जहाँयेजहाँरहेरहे
मकींकीख़ैरहोयारबमकाँरहेरहे
अभीमज़ारपरअहबाबफ़ातिहापढ़लें
फिरइसक़दरभीहमारानिशाँरहेरहे
ख़ुदाकेवास्तेक़लमाबुतोंकापढ़ज़ाहिद
फिरइख़्तियारमेंग़ाफ़िलज़बाँरहेरहे
ख़िज़ाँतोख़ैरसेगुज़रीचमनमेंबुलबुलकी
बहारआईहैअबआशियाँरहेरहे
चलातोहूँपएइज़हार-ए-दर्द-ए-दिलदेखूँ
हुज़ूर-ए-यारमजाल-ए-बयाँरहेरहे
'अमीर'जमाहैंअहबाबदर्द-ए-दिलकहले
फिरइल्तिफ़ात-ए-दिल-ए-दोस्ताँरहेरहे
  - Ameer Minai
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