daulat-e-duniya kahaan darkaar hai | दौलत-ए-दुनिया कहाँ दरकार है

  - Ameer Chand Bahar
दौलत-ए-दुनियाकहाँदरकारहै
मुझकोतेराआस्ताँदरकारहै
आपकोभीइकसहाराचाहिए
मुझकोभीइकहम-ज़बाँदरकारहै
ज़िंदगीकीइसकड़कतीधूपमें
साया-ए-सर्द-ए-रवाँदरकारहै
बर्क़-ओ-बाराँकाउड़ाएजोमज़ाक़
आजवोअज़्म-ए-जवाँदरकारहै
ज़िंदगीसेहैइबारतइकजिहाद
शे'रकीताब-ओ-तवाँदरकारहै
तीर-ओ-नश्तरशे'रयूँँबनतानहीं
इकदिल-ए-आतिशीं-फ़शाँदरकारहै
चाहिएइक़बालकीफ़िक्र-ए-रसा
दाग़कीतब-ए-रवाँदरकारहै
होतहारत'हाली'-ओ-'महरूम'की
'मीर'-ओ-'मोमिन'कीज़बाँदरकारहै
शे'रसेमहज़ूज़होनेकेलिए
लज़्ज़त-ए-दर्द-ए-निहाँदरकारहै
अहल-ए-महफ़िलकोतरन्नुमचाहिए
शा'इरीउनकोकहाँदरकारहै
मुर्शिद-ए-कामिलकीमुझकोहैतलाश
मज्लिस-ए-रुहानियाँदरकारहै
रूहकोजिससेमिलेबालीदगी
मुझकोवोपीर-ए-मुग़ाँदरकारहै
मनकासारामैलजिससेदूरहो
वोशराब-ए-अर्ग़वाँदरकारहै
हमपेजोगुज़रीवोकहनेकेलिए
हुस्न-ओ-उस्लूब-ए-बयाँदरकारहै
ज़िंदगीकाराज़पानेकेलिए
हमकोउम्र-ए-जावेदाँदरकारहै
मुझकोअपनेदोस्तोंसे'बहार'
इकख़ुलूस-ए-बे-कराँदरकारहै
  - Ameer Chand Bahar
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