bujh jaa.e dil bashar ka to us ko shifaa se kya | बुझ जाए दिल बशर का तो उस को शिफ़ा से क्या

  - Ameer Chand Bahar
बुझजाएदिलबशरकातोउसकोशिफ़ासेक्या
किसदर्जाहोगीकार-गरउसकोदवासेक्या
झुलसाकेरखदियाजिसेबाद-ए-सुमूमने
ग़ुंचोंसेक्याग़रज़उसेबाद-ए-सबासक्या
दोवक़्तजिसग़रीबकोरोटीहोनसीब
मज़हबकाक्याकरेउसेज़िक्र-ए-ख़ुदासक्या
रहनेकोझोंपड़ाभीजिसशख़्सकोमिले
उसकोसज़ाकीफ़िक्रक्याउसकोजज़ासेक्या
जिसकेबदनपेगोश्तदिखाईदेकहीं
उसआदमीकोरूहकीनशो-ओ-नुमासेक्या
तंगचुकाहोकशमकश-ए-ज़िंदगीसेजो
क्यामह-वशोंसेकामउसेदिलरुबासक्या
फ़िक्र-ए-मआ'शहीसेफ़ुर्सतमिलेजिसे
शेर-ओ-अदबसेक्याउसेमेहर-ओ-वफ़ासेक्या
सुनताहोजोज़मीरकीआवाज़दोस्तो
उसकोकिसीख़िज़रसेकिसीरहनुमासेक्या
रहताहोअपनीज़ातमेंजोमस्तहरघड़ी
उसकोसरा-ए-दहरकीआब-ओ-हवासेक्या
कहनाहोजोभीआपउसेबरमलाकहें
लफ़्ज़ोंकेहेर-फेरसेतर्ज़-ए-अदासक्या
  - Ameer Chand Bahar
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