laale pade hain jaan ke jeene ka ehtimaam kar | लाले पड़े हैं जान के जीने का एहतिमाम कर

  - Ameen Hazin
लालेपड़ेहैंजानकेजीनेकाएहतिमामकर
जिनमेंहोकैफ़-ए-ज़िंदगीबहर-ए-ख़ुदावोकामकर
तौर-ए-हयातसेउड़ाजज़्बा-ए-ज़ीस्तनकीआग
जबकहींजाकेनियत-ए-ज़िंदगीदवामकर
पहलेयेसोचदामकेतोड़नेकीसकतभीहै
बादकोदिलमेंख़्वाहिश-ए-दाना-ए-ज़ेर-ए-दामकर
तुझकोतिरीहीआँखसेदेखरहीहैकाएनात
बातयेराज़कीनहींअपनाख़ुदएहतिरामकर
हैफ़समझरहाहैतूअपनीझिजककोमोहतसिब
मय-कदा-ए-हयातमेंशौक़सेमय-ब-जामकर
नक़्श-नवीनहींहैतूसफ़्हा-ए-रोज़गारपर
मिटनेसेगरनहींमफ़रमिटहीकेअपनानामकर
बंदा-ए-ख़्वाहिशातकोकहताहैकौनअब्द-ए-हुर
चाहिएहुर्रियतअगरदिलको'अमीं'ग़ुलामकर
  - Ameen Hazin
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