afsaana-e-hayaat ko dohraa raha hooñ main | अफ़्साना-ए-हयात को दोहरा रहा हूँ मैं

  - Ameen Hazin
अफ़्साना-ए-हयातकोदोहरारहाहूँमैं
यूँँअपनीउम्र-ए-रफ़्ताकोलौटारहाहूँमैं
इकइकक़दमपेदर्स-ए-वफ़ादेरहाहूँमैं
येकिसकीजुस्तुजूहैकिधरजारहाहूँमैं
यारबकिसीकादाम-ए-हसींमुंतज़िरहो
परशौक़केलगेहैंउड़ाजारहाहूँमैं
इससेहर-ए-रंग-ओ-बूनेतोदीवानाकरदिया
दामनकेतारतारकोउलझारहाहूँमैं
सोज़-ए-दरून-ए-सीनाकोनग़्मोंमेंढालकर
साज़-ए-नफ़सकेतारकोबर्मारहाहूँमैं
राह-ए-तलबमेंदेखमिरेदिलकीहसरतें
साएमेंपा-ए-ख़िज़्रकोसहलारहाहूँमैं
रस्तेकीऊँचनीचसेवाक़िफ़तोहूँ'अमीं'
ठोकरक़दमक़दमपेमगरखारहाहूँमैं
  - Ameen Hazin
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