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Ambar
yaar mere chhedte hain mujhko tere naam se
yaar mere chhedte hain mujhko tere naam se | यार मेरे छेड़ते हैं मुझको तेरे नाम से
- Ambar
यार
मेरे
छेड़ते
हैं
मुझको
तेरे
नाम
से
इस
बरस
भी
दिल
दुखाने
आ
गई
है
फ़रवरी
- Ambar
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बात
करो
रूठे
यारों
से
सन्नाटों
से
डर
जाते
हैं
प्यार
अकेला
जी
लेता
है
दोस्त
अकेले
मर
जाते
हैं
Kumar Vishwas
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जैसे
पतवार
सफ़ीने
के
लिए
होते
हैं
दोस्त
अहबाब
तो
जीने
के
लिए
होते
हैं
इश्क़
में
कोई
तमाशा
नहीं
करना
होता
अश्क
जैसे
भी
हों
पीने
के
लिए
होते
हैं
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Khalid Nadeem Shani
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खुशियाँ
उसी
के
साथ
हैं
जो
ग़म
गुसार
है
ऐसे
हरेक
शख़्स
ही
दुनिया
का
यार
है
Sunny Seher
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भले
ही
प्यार
हो
या
हिज्र
हो
या
फिर
सियासत
हो
कुछ
ऐसे
दोस्त
थे
हर
बात
पर
अश'आर
कहते
थे
Siddharth Saaz
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एक
ही
नदी
के
हैं
ये
दो
किनारे
दोस्तो
दोस्ताना
ज़िंदगी
से
मौत
से
यारी
रखो
Rahat Indori
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बादलों
में
से
छनता
हुआ
नूर
देख
ऐसी
रौशन
जबीं
है
मेरे
यार
की
Afzal Ali Afzal
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कोई
दिक़्क़त
नहीं
है
गर
तुम्हें
उलझा
सा
लगता
हूँ
मैं
पहली
मर्तबा
मिलने
में
सबको
ऐसा
लगता
हूँ
ज़रूरी
तो
नहीं
हम
साथ
हैं
तो
कोई
चक्कर
हो
वो
मेरी
दोस्त
है
और
मैं
उसे
बस
अच्छा
लगता
हूँ
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Ali Zaryoun
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अब
दोस्त
कोई
लाओ
मुक़ाबिल
में
हमारे
दुश्मन
तो
कोई
क़द
के
बराबर
नहीं
निकला
Munawwar Rana
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कुछ
तो
कर
आदाब-ए-महफ़िल
का
लिहाज़
यार
ये
पहलू
बदलना
छोड़
दे
Waseem Barelvi
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बंद
कमरे
में
हज़ारों
मील
अब
चलते
हैं
हम
काफ़ी
महँगी
पड़
रही
है
शा'इरी
से
दोस्ती
Ashraf Jahangeer
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तुझ
को
दिल
में
बसा
के
रक्खा
है
दूरियों
को
मिटा
के
रक्खा
है
जब
सुना
चाँद
आने
वाला
है
दीप
घर
का
बुझा
के
रक्खा
है
जाल
उसने
बिछा
के
रक्खा
है
रुख़
से
सब
को
लुभा
के
रक्खा
है
जब
गया
तू
मुझे
अकेला
छोड़
तब
से
दिल
को
दुखा
के
रक्खा
है
क्या
हुआ
है
तुझे
मोहब्बत
में
हाल
कैसा
बना
के
रक्खा
है
हाँ
या
ना
में
जवाब
दे
दे
अब
ख़ामख़ा
ही
फँसा
के
रक्खा
है
हाल
भी
तो
बता
दे
अपना
तू
मैं
बिज़ी
हूँ
बता
के
रक्खा
है
मानता
क्यूँँ
नहीं
तू
मेरी
बात
काहे
इतना
सता
के
रक्खा
है
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Ambar
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मेरे
ज़ख़्मों
पर
हँसने
वाले
तेरा
हाल
भी
इक
दिन
मेरे
जैसा
होना
है
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मिले
इज़्तिराब-ओ-दर्द
बस
न
लगे
ये
रोग
तुम्हें
कभी
वो
रहा
क़रीब
सदा
मिरे
न
बिछड़
सके
न
मिले
कभी
Ambar
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जानम
तुमको
और
भी
कुछ
आता
है
क्या
या
बस
मुझको
पागल
करना
आता
है
Ambar
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क़िस्मत
मेरी
बारी
में
ही
पता
नहीं
क्यूँ
सो
जाती
है
Ambar
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