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Ambar
mere dil men kya hai agar tum samjhte
mere dil men kya hai agar tum samjhte | मेरे दिल में क्या है अगर तुम समझते
- Ambar
मेरे
दिल
में
क्या
है
अगर
तुम
समझते
तो
रिश्ता
हमारा
भी
कुछ
और
होता
- Ambar
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अगर
लगता
है
वो
क़ाबिल
नहीं
है
तो
रिश्ता
तोड़ना
मुश्किल
नहीं
है
रक़ीब
आया
है
मेरे
शे'र
सुनने
तो
अब
ये
जंग
है
महफ़िल
नहीं
है
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Tanoj Dadhich
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एक
रिश्ता
जिसे
मैं
दे
न
सका
कोई
नाम
एक
रिश्ता
जिसे
ता-उम्र
निभाए
रक्खा
Aks samastipuri
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अब
मज़ीद
उस
सेे
ये
रिश्ता
नहीं
रक्खा
जाता
जिस
सेे
इक
शख़्स
का
पर्दा
नहीं
रक्खा
जाता
पढ़ने
जाता
हूँ
तो
तस्में
नहीं
बाँधे
जाते
घर
पलटता
हूँ
तो
बस्ता
नहीं
रक्खा
जाता
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Tehzeeb Hafi
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इतना
धीरे-धीरे
रिश्ता
ख़त्म
हुआ
बहुत
दिनों
तक
लगा
नहीं
हम
बिछड़े
हैं
Ajmal Siddiqui
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जो
बच
गए
हैं
चराग़
उनको
बचाये
रक्खो
मैं
चाहता
हूँ
हवा
से
रिश्ता
बनाये
रक्खो
Azm Shakri
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मेरे
दर्द
की
वो
दवा
है
मगर
मेरा
उस
सेे
कोई
भी
रिश्ता
नहीं
मुसलसल
मिलाता
है
मुझ
सेे
नज़र
मैं
कैसे
कहूँ
वो
फ़रिश्ता
नहीं
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S M Afzal Imam
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अपना
रिश्ता
ज़मीं
से
ही
रक्खो
कुछ
नहीं
आसमान
में
रक्खा
Jaun Elia
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उसने
हँसते
हुए
तोड़ा
था
हमारा
रिश्ता
हम
सभी
को
ये
बताते
हुए
रो
देते
हैं
Zubair Alam
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प्यार
का
रिश्ता
ऐसा
रिश्ता
शबनम
भी
चिंगारी
भी
यानी
उन
सेे
रोज़
ही
झगड़ा
और
उन्हीं
से
यारी
भी
Ateeq Allahabadi
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जीत
भी
लूँ
गर
लड़ाई
तुम
से
मैं
तो
क्या
मिलेगा
हाथ
में
दोनों
के
बस
इक
टूटा
सा
रिश्ता
मिलेगा
कर
के
लाखों
कोशिशें
गर
जो
बचा
भी
लूँ
मैं
रिश्ता
तो
नहीं
फिर
मन
हमारा
पहले
के
जैसा
मिलेगा
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Ankit Maurya
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चले
भी
जाओ
अब
दिल
से
हमारे
करो
ख़ाली
अभी
कमरा
हमारा
Ambar
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हर
मंदिर
हर
मस्जिद
में
जा
कर
मैंने
केवल
तुमको
पाने
को
फ़रियाद
किया
Ambar
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करना
जो
था
वो
कर
नहीं
पाया
मैं
तो
मर
के
भी
मर
नहीं
पाया
आज
भी
उसको
याद
करता
हूँ
क्यूँ
मैं
अब
तक
सुधर
नहीं
पाया
जो
तमन्ना
उगाई
थी
हमने
बस
वही
इक
शजर
नहीं
पाया
ख़ाक
छानी
ज़माने
की
लेकिन
एक
तेरा
ही
दर
नहीं
पाया
वो
बुरा
लाख
था
मगर
वो
शख़्स
दिल
से
मेरे
उतर
नहीं
पाया
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Ambar
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अब
लगी
है
आग
सीने
में
जुदा
होने
के
बाद
कौन
बोला
था
तुझे
तू
प्यार
का
इक़रार
कर
Ambar
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अब
इसके
सिवा
कोई
चारा
नहीं
मुहब्बत
करेंगे
दुबारा
नहीं
बहुत
आया
ग़ुस्सा
था
तुझपे
मगर
मना
शुक्र
तुझको
मैं
मारा
नहीं
हो
जितनी
भी
मुझ
में
सहनशीलता
तेरा
रूठ
जाना
गवारा
नहीं
इक
अरसे
तलक
मैं
रहा
मुंतज़िर
तुम्हीं
ने
था
मुझको
पुकारा
नहीं
ज़मीं
छोड़ने
पे
था
मजबूर
मैं
है
कौन
अपनी
माँ
का
दुलारा
नहीं
नहीं
टूट
सकता
करूँँ
क्या
सनम
कि
अंबर
हूँ
यारा
मैं
तारा
नहीं
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Ambar
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