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Ambar
kaash hamaari qismat men
kaash hamaari qismat men | काश हमारी क़िस्मत में
- Ambar
काश
हमारी
क़िस्मत
में
तुम
से
मिलना
लिखा
होता
- Ambar
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ख़ुश
रहते
हैं
हँस
सकते
हैं
भोले
भाले
होते
हैं
वो
जो
शे'र
नहीं
कहते
हैं
क़िस्मत
वाले
होते
हैं
पीना
अच्छी
बात
नहीं
है
आते
हैं
समझाने
दोस्त
और
ढलते
ही
शाम
उन्हें
फिर
हमीं
सँभाले
होते
हैं
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Vineet Aashna
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कोई
भी
रोक
न
पाता,
गुज़र
गया
होता
मेरा
नसीब-ए-मोहब्बत
सँवर
गया
होता
न
आईं
होती
जो
बेग़म
मेरी
अयादत
को
मैं
अस्पताल
की
नर्सों
पर
मर
गया
होता
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Paplu Lucknawi
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खो
दिया
तुम
को
तो
हम
पूछते
फिरते
हैं
यही
जिस
की
तक़दीर
बिगड़
जाए
वो
करता
क्या
है
Firaq Gorakhpuri
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हुस्न
को
भी
कहाँ
नसीब
'जिगर'
वो
जो
इक
शय
मिरी
निगाह
में
है
Jigar Moradabadi
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फिर
एक
रोज़
मुक़द्दर
से
हार
मानी
गई
ज़बीन
चूम
के
बोला
गया
"ख़ुदा
हाफ़िज़"
Afkar Alvi
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किताब-ए-मुक़द्दर
में
रांझा
दिवाना
मगर
हीर
बेहद
सयानी
लिखी
थी
Amaan Pathan
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ख़्वाहिश
सब
रखते
हैं
तुझको
पाने
की
और
फिर
अपनी
अपनी
क़िस्मत
होती
है
Bhaskar Shukla
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मिलना
था
इत्तिफ़ाक़
बिछड़ना
नसीब
था
वो
उतनी
दूर
हो
गया
जितना
क़रीब
था
Anjum Rehbar
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मुझको
बदन
नसीब
था
पर
रूह
के
बग़ैर
उसने
दिया
भी
फूल
तो
ख़ुशबू
निकाल
कर
Ankit Maurya
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ये
ज़ुल्फ़
अगर
खुल
के
बिखर
जाए
तो
अच्छा
इस
रात
की
तक़दीर
सँवर
जाए
तो
अच्छा
जिस
तरह
से
थोड़ी
सी
तेरे
साथ
कटी
है
बाक़ी
भी
उसी
तरह
गुज़र
जाए
तो
अच्छा
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Sahir Ludhianvi
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मेरी
हीरिए
मेरी
हम-नवा
मेरी
जान-ए-जाँ
मेरी
दिलरुबा
मैं
मुरीद
हूँ
तेरे
नाम
का
तेरी
सादगी
पे
हूँ
मर
मिटा
कहीं
खो
न
दूँ
तुझे
अगले
पल
इसी
सोच
में
रहा
जागता
तुझे
पा
लिया
है
ये
सच
मगर
लगे
क्यूँ
मुझे
ये
है
ख़्वाब
सा
ये
जो
चाहतें
मेरे
दिल
में
है
तुझे
क्या
ख़बर
तुझे
क्या
पता
मैं
भले
ही
लब
से
न
कह
सकूँ
तुझे
देखने
को
तड़प
रहा
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Ambar
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दिल
धड़क
उठता
है
मेरा
अब
भी
तेरे
नाम
से
कुछ
तो
बाक़ी
रह
गया
है
तेरे
मेरे
दरमियाँ
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ग़ैर
से
नाता
जोड़
सकोगे
सच
में
क्या
मुझ
सेे
रिश्ता
तोड़
सकोगे
सच
में
क्या
तुम
सेे
पहले
जो
भी
मेरी
दुनिया
थी
तुम
वो
दुनिया
मोड़
सकोगे
सच
में
क्या
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Ambar
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ज़रा
सी
अपनी
बात
नहीं
मिलने
पे
तुम
यूँँ
रूठे
हो
जैसे
उलफ़त
थी
ही
नहीं
Ambar
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था
वो
कोमल
फूल
बराबर
मैं
ठहरा
बस
धूल
बराबर
जाओ
अपनी
मंज़िल
ढूँढों
अपना
मिलना
भूल
बराबर
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Ambar
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