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Ambar
meri heeriye meri ham-nava meri jaan-e-jaan meri dilruba
meri heeriye meri ham-nava meri jaan-e-jaan meri dilruba | मेरी हीरिए मेरी हम-नवा मेरी जान-ए-जाँ मेरी दिलरुबा
- Ambar
मेरी
हीरिए
मेरी
हम-नवा
मेरी
जान-ए-जाँ
मेरी
दिलरुबा
मैं
मुरीद
हूँ
तेरे
नाम
का
तेरी
सादगी
पे
हूँ
मर
मिटा
कहीं
खो
न
दूँ
तुझे
अगले
पल
इसी
सोच
में
रहा
जागता
तुझे
पा
लिया
है
ये
सच
मगर
लगे
क्यूँ
मुझे
ये
है
ख़्वाब
सा
ये
जो
चाहतें
मेरे
दिल
में
है
तुझे
क्या
ख़बर
तुझे
क्या
पता
मैं
भले
ही
लब
से
न
कह
सकूँ
तुझे
देखने
को
तड़प
रहा
- Ambar
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उसको
नंबर
देके
मेरी
और
उलझन
बढ़
गई
फोन
की
घंटी
बजी
और
दिल
की
धड़कन
बढ़
गई
Ana Qasmi
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ये
ज़मीं
किस
क़दर
सजाई
गई
ज़िंदगी
की
तड़प
बढ़ाई
गई
आईने
से
बिगड़
के
बैठ
गए
जिन
की
सूरत
जिन्हें
दिखाई
गई
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Sahir Ludhianvi
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हर
एक
चौखट
खुली
हुई
थी
हर
इक
दरीचा
खुला
हुआ
था
कि
उसकी
आमद
पे
दर
यहाँ
तक
कि
बेघरों
का
खुला
हुआ
था
ये
तेरी
हम्म
ने
हमें
ही
उलझन
में
डाल
रक्खा
है
वरना
हम
पर
तमाम
साइंस
के
फ़लसफ़ों
का
हर
एक
चिट्ठा
खुला
हुआ
था
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Saad Ahmad
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मेरी
बेचैनी
का
आलम
मेरी
बेचैनी
से
पूछो
मेरे
चहरे
से
पूछोगे
कहेगा
ठीक
है
सब
कुछ
Aqib khan
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न
आया
ग़म
भी
मोहब्बत
में
साज़गार
मुझे
वो
ख़ुद
तड़प
गए
देखा
जो
बे-क़रार
मुझे
Asad Bhopali
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न
हुआ
नसीब
क़रार-ए-जाँ
हवस-ए-क़रार
भी
अब
नहीं
तिरा
इंतिज़ार
बहुत
किया
तिरा
इंतिज़ार
भी
अब
नहीं
तुझे
क्या
ख़बर
मह-ओ-साल
ने
हमें
कैसे
ज़ख़्म
दिए
यहाँ
तिरी
यादगार
थी
इक
ख़लिश
तिरी
यादगार
भी
अब
नहीं
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Jaun Elia
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अब
शहर
की
थकावट
बेचैन
कर
रही
है
अब
शाम
हो
गई
है
चल
माँ
से
बात
कर
लें
Akash Rajpoot
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ऐ
दिल
की
ख़लिश
चल
यूँँही
सही
चलता
तो
हूँ
उन
की
महफ़िल
में
उस
वक़्त
मुझे
चौंका
देना
जब
रंग
पे
महफ़िल
आ
जाए
Behzad Lakhnavi
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मैं
पा
सका
न
कभी
इस
ख़लिश
से
छुटकारा
वो
मुझ
से
जीत
भी
सकता
था
जाने
क्यूँँ
हारा
Javed Akhtar
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उसे
बेचैन
कर
जाऊँगा
मैं
भी
ख़मोशी
से
गुज़र
जाऊँगा
मैं
भी
Ameer Qazalbash
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क्यूँँ
मानूँ
मैं
बात
तुम्हारी
तुम
सेे
मेरा
रिश्ता
क्या
है
Ambar
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साथ
वो
जो
चला
नहीं
करती
बिन
मेरे
भी
रहा
नहीं
करती
उस
में
होगी
ज़रूर
कोई
बात
मेरी
सब
सेे
बना
नहीं
करती
कोई
रोता
तो
कोई
हँसता
है
ज़ीस्त
सबका
भला
नहीं
करती
ये
नमाज़ें
ख़फ़ा
सी
लगती
हैं
मेरे
हक़
में
दु'आ
नहीं
करती
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Ambar
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जिसे
चाहो
वो
मिलता
ही
नहीं
है
मुझे
अब
इश्क़
करना
ही
नहीं
है
Ambar
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तमन्ना
है
जब
भी
मुलाक़ात
हो
तुम्हें
मुस्कुराता
ही
देखा
करूँँ
Ambar
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मेरे
अलावा
बाक़ी
सब
दिख
जाते
हैं
इन
आँखों
में
मेरी
सूरत
कब
होगी
Ambar
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