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Ambar
tamannaa hai jab bhi mulaqaat ho
tamannaa hai jab bhi mulaqaat ho | तमन्ना है जब भी मुलाक़ात हो
- Ambar
तमन्ना
है
जब
भी
मुलाक़ात
हो
तुम्हें
मुस्कुराता
ही
देखा
करूँँ
- Ambar
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चंद
कलियाँ
नशात
की
चुन
कर
मुद्दतों
महव-ए-यास
रहता
हूँ
तेरा
मिलना
ख़ुशी
की
बात
सही
तुझ
से
मिल
कर
उदास
रहता
हूँ
Sahir Ludhianvi
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बिछड़
के
तुझ
सेे
न
देखा
गया
किसी
का
मिलाप
उड़ा
दिए
हैं
परिंदे
शजर
पे
बैठे
हुए
Adeem Hashmi
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चले
भी
आओ
भुला
कर
सभी
गिले-शिकवे
बरसना
चाहिए
होली
के
दिन
विसाल
का
रंग
Azhar Iqbal
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आरज़ू
वस्ल
की
रखती
है
परेशाँ
क्या
क्या
क्या
बताऊँ
कि
मेरे
दिल
में
है
अरमाँ
क्या
क्या
Akhtar Shirani
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नहीं
निगाह
में
मंज़िल
तो
जुस्तुजू
ही
सही
नहीं
विसाल
मुयस्सर
तो
आरज़ू
ही
सही
Faiz Ahmad Faiz
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ठीक
थी
उन
सेे
मुलाक़ात
मगर
ठीक
ही
थी
फ़िल्म
इतनी
नहीं
अच्छी
कि
दोबारा
देखूँ
Bhaskar Shukla
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पूरा
करेंगे
होली
में
क्या
वादा-ए-विसाल
जिन
को
अभी
बसंत
की
ऐ
दिल
ख़बर
नहीं
Kalb-E-Hussain Nadir
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बात
से
बात
बनेगी
तू
कभी
बात
तो
कर
आ
ज़रा
पास
मिरे
यार
मुलाक़ात
तो
कर
पूछ
तू
भी
तो
कभी
हाल
हमारे
दिल
का
हाल
से
हाल
मिलाने
की
शुरूआत
तो
कर
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shaan manral
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हर
मुलाक़ात
पे
सीने
से
लगाने
वाले
कितने
प्यारे
है
मुझे
छोड़
के
जाने
वाले
Vipul Kumar
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ये
किस
ने
बाग़
से
उस
शख़्स
को
बुला
लिया
है
परिंद
उड़
गए
पेड़ों
ने
मुँह
बना
लिया
है
उसे
पता
था
मैं
छूने
में
वक़्त
लेता
हूँ
सो
उस
ने
वस्ल
का
दौरानिया
बढ़ा
लिया
है
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Tehzeeb Hafi
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दोस्ती
तो
कर
हैं
लेते
सब
मगर
दोस्तों
की
सुनता
है
कोई
कोई
Ambar
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जिसे
चाहो
वो
मिलता
ही
नहीं
है
मुझे
अब
इश्क़
करना
ही
नहीं
है
Ambar
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किया
जो
तूने
तेरे
साथ
वही
होगा
इस
संसार
में
तुझ
सा
भी
कोई
होगा
तू
भी
मेरे
जैसा
पल
पल
तड़पेगा
वो
भी
तेरे
जैसा
बे-दर्दी
होगा
भूलूँगा
तुझको
जैसे
तू
भूला
है
तूने
कैसे
सोच
लिया
ये
भी
होगा
हर
डाली
पर
जाकर
प्रेम
निभाता
है
प्यार
तुम्हारा
इक
उड़ता
पंछी
होगा
मेरी
सारी
कमियाँ
जो
अपनाएगा
वो
ही
मेरा
इक
सच्चा
साथी
होगा
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Ambar
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ऐसा
भी
नहीं
था
दुनिया
में
जिस्मों
की
कमी
महसूस
हुई
मैं
अब
तक
तन्हा
क्यूँँ
रहता
गर
जिस्म
पे
मरना
ही
होता
Ambar
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तुम्हीं
से
दिल-लगी
है
आशिक़ी
है
ज़िंदगी
भी
है
मगर
फिर
भी
तुम्हें
पाना
फ़क़त
इक
ख़्वाब
जैसा
है
Ambar
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