शबख़्वाबकेजज़ीरोंमेंहँसकरगुज़रगई
आँखोंमेंवक़्त-ए-सुब्हमगरधूलभरगई
पिछलीरुतोंमेंसारेशजरबारवरतोथे
अबकेहरएकशाख़मगरबे-समरगई
हमभीबढ़ेथेवादी-ए-इज़हारमेंमगर
लहजेकेइंतिशारसेआवाज़मरगई
तुझफूलकेहिसारमेंइकलुत्फ़हैअजब
छूकरजिसेहवा-ए-तरब-ए-मोतबरगई
दिलमेंअजबसातीरतराज़ूहैइनदिनों
हाँऐनिगाह-ए-नाज़बतातूकिधरगई
मक़्सदसला-ए-आमहैफिरएहतियातक्यूँँ
बे-रंगरौज़नोंसेजोख़ुशबूगुज़रगई
उसकेदयारमेंकईमहताबभेजकर
वादी-ए-दिलमेंइकअमावसठहरगई
अबकेक़फ़ससेदूररहीमौसमीहवा
आज़ादताएरोंकेपरोंकोकतरगई
आँधीनेसिर्फ़मुझकोमुसख़्ख़रनहींकिया
इकदश्त-ए-बे-दिलीभीमिरेनामकरगई
फिरचार-सूकसीफ़धुएँफैलनेलगे
फिरशहरकीनिगाहतेरेक़स्रपरगई
अल्फ़ाज़केतिलिस्मसे'अंबर'कोहैशग़फ़
उसकीहयातकैसेभलाबे-बुनरगई