ulfaton ke saaghar men saazishein milaate hain | उल्फ़तों के साग़र में साज़िशें मिलाते हैं

  - Ambar Abid
उल्फ़तोंकेसाग़रमेंसाज़िशेंमिलातेहैं
दोस्तीकेपर्देमेंदुश्मनीनिभातेहैं
ख़ाककरकेबैठेहैंआशियाँहमींअपना
बिजलियाँदिखाकरयूँँआपक्याडरातेहैं
शामतेरेमाथेपेरातयूँँइबादतहै
जुगनूभीचमकतेहैंतारेझिलमिलातेहैं
कोईजानेवालेकोकिसतरहयेसमझाए
वापसीमेंदिनइतनेआपक्यूँलगातेहैं
शोरसुनकेबारिशकादिलमचलसाजाताहै
भीगेभीगेफूलोंसेहमलजासेजातेहैं
फ़िक्रभीहैजज़्बाभीरंजभीख़ुशीभीहै
शाइ'रीनहींहमतोहाल-ए-दिलसुनातेहैं
मुश्किलोंसेसीखाहैहमनेयेहुनर'अंबर'
रास्तेजुदाअपनेकिसतरहबनातेहैं
  - Ambar Abid
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