charaaghh jal to raha hai ziya nahin aati | चराग़ जल तो रहा है ज़िया नहीं आती

  - Ambar Abid
चराग़जलतोरहाहैज़ियानहींआती
हवाभीतेज़हैलेकिनहवानहींआती
अजीबहिज्रकाआलमहैक्याकियाजाए
सिवाएदिलकेकिसीकीसदानहींआती
तवक़्क़ुआ'तकीचादरसमेटलेतेहैं
हमारेलबपेकभीबद-दुआ'नहींआती
तुम्हारेइश्क़नेबख़्शीहैबेकलीगरचे
वफ़ाकीराहमेंहमकोजफ़ानहींआती
सियाहहोगयादिलउसकाइसक़दरअबतो
किबे-हयाईपेअपनीहयानहींआती
हयाहिजाबपेकरतेहैंतब्सिरे'अंबर'
सरोंपेजिनकेकभीभीरिदानहींआती
  - Ambar Abid
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