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Aman G Mishra
parinde nahin ham magar par hamaare
parinde nahin ham magar par hamaare | परिंदे नहीं हम मगर पर हमारे
- Aman G Mishra
परिंदे
नहीं
हम
मगर
पर
हमारे
ज़मीं
की
हिफ़ाज़त
करें
आ
समाँ
से
- Aman G Mishra
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देख
कैसे
धुल
गए
है
गिर्या-ओ-ज़ारी
के
बाद
आसमाँ
बारिश
के
बाद
और
मैं
अज़ादारी
के
बाद
इस
सेे
बढ़
कर
तो
तुझे
कोई
हुनर
आता
नहीं
सोचता
हूँ
क्या
करेगा
दिल
आज़ारी
के
बाद
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Abbas Tabish
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सोचता
हूँ
कि
यूँँ
न
हो
इक
दिन
ये
ज़मीं
कोई
आसमाँ
निकले
Vikas Rana
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ये
आसमाँ
में
कोई
बुत
बैठा
भी
है
कि
नईं
या
हम
ज़मीं
के
लोग
यूँँ
ही
चीखते
हैं
बस
Siddharth Saaz
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चाहे
हो
आसमान
पे
चाहे
ज़मीं
पे
हो
वहशत
का
रक़्स
हम
ही
करेंगे
कहीं
पे
हो
दिल
पर
तुम्हारे
नाम
की
तख़्ती
लगी
न
थी
फिर
भी
ज़माना
जान
गया
तुम
यहीं
पे
हो
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Nirmal Nadeem
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आसमाँ
ने
बंद
कर
लीं
खिड़कियाँ
अब
ज़मीं
में
उसकी
दिलचस्पी
नहीं
Rajesh Reddy
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मैं
घंटों
आसमाँ
में
देखता
था
ज़मीं
को
पीठ
के
नीचे
लगा
के
Siddharth Saaz
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उस
के
चेहरे
की
चमक
के
सामने
सादा
लगा
आसमाँ
पे
चाँद
पूरा
था
मगर
आधा
लगा
Iftikhar Naseem
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मुझे
मालूम
है
उस
का
ठिकाना
फिर
कहाँ
होगा
परिंदा
आसमाँ
छूने
में
जब
नाकाम
हो
जाए
Bashir Badr
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ऐ
आसमान
तेरे
ख़ुदा
का
नहीं
है
ख़ौफ़
डरते
हैं
ऐ
ज़मीन
तेरे
आदमी
से
हम
Unknown
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तुम
आसमान
पे
जाना
तो
चाँद
से
कहना
जहाँ
पे
हम
हैं
वहाँ
चांदनी
बहुत
कम
है
Shakeel Azmi
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ज़िन्दगी
के
साथ
बहते
जा
रहे
हैं
और
अपनी
बात
कहते
जा
रहे
हैं
वो
समझते
हैं
कि
उनकी
जीत
है
ये
हम
ख़ुशी
से
मात
सहते
जा
रहे
हैं
एक
पल
तक
जो
महल
के
रूप
में
थे
वो
सभी
जज़्बात
ढहते
जा
रहे
हैं
नौकरी,
घर,
और
बच्चों
की
पढ़ाई
के
लिए
हर
बात
सहते
जा
रहे
हैं
सोचते
हैं
अब
इन्हें
आज़ाद
कर
दें
हम
ग़मों
के
साथ
रहते
जा
रहे
हैं
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Aman G Mishra
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जो
है
ज़रूरी
वही
नहीं
है
नहीं
तो
कोई
कमी
नहीं
है
जो
पास
है
कुछ,दिया
उसी
का
जो
कुछ,
नहीं
है;
वही
नहीं
है
उसे
बुरा
यदि
कहे
भी
कोई
यक़ीन
करना
सही
नहीं
है
उसे
मुहब्बत
सिखाए
कोई
उसे
मुहब्बत
हुई
नहीं
है
हुई
मुहब्बत
उसी
हसीं
से
कि
उसके
जैसी
कोई
नहीं
है
कि
उसकी
बातें
हैं
छाँव
जैसी
कि
छाँव
हमको
मिली
नहीं
है
अमन
मुहब्बत
में
डूब
जाए
ये
बात
कोई
नई
नहीं
है
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Aman G Mishra
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जब
तुम्हारी
बात
होगी
वो
ग़ज़ल
की
रात
होगी
गुनगुनाए
गीत
सावन
रिमझिमी
बरसात
होगी
चाँद
छत
पे
और
वो
भी
देखिये
क्या
बात
होगी
आज
ऐसा
लग
रहा
है
प्रेम
की
शुरुआत
होगी
और
शायद
ख़्वाब
में
ही
सज
रही
बारात
होगी
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Aman G Mishra
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पूछिए
मत
नाम
क्या
है
आप
कहिए
काम
क्या
है
औपचारिकता
निभाना
सुब्ह
क्या
है
शाम
क्या
है
भूमिका
की
क्या
ज़रूरत
जानता
हूँ
दाम
क्या
है
रैलियों
के
मुख्य
वक़्ता
को
पता
क्या
जाम
क्या
है
राजनीतिज्ञों
बताओ
ख़ास
क्या
है
आम
क्या
है
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Aman G Mishra
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इक
अधूरा
गीत
पूरा
कर
रहा
हूँ
और
ख़ुद
को
मैं
अधूरा
कर
रहा
हूँ
ये
ख़बर
फैली
कि
क़िस्सा
कर
रहा
हूँ
मैं
कि
हर
क़िस्सा
अधूरा
कर
रहा
हूँ
शा'इरी
आसाँ
नहीं
होती
अमन
जी
रोज़
लगता
है
यही,
क्या
कर
रहा
हूँ
आप
को
ये
प्रेम
झूठा
लग
रहा
है
आप
से
मैं
प्रेम
सच्चा
कर
रहा
हूँ
ज़िन्दगी
के
गीत
भी
मैं
गा
न
पाया
ज़िंदगी
में
ख़ाक
अच्छा
कर
रहा
हूँ
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Aman G Mishra
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