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Aman Mishra 'Anant'
maine saal maheeno barson se
maine saal maheeno barson se | मैंने साल महीनो बरसों से
- Aman Mishra 'Anant'
मैंने
साल
महीनो
बरसों
से
काम
चलाया
हैं
बस
अश्कों
से
खेल
रहे
हैं
अब
जो
ग़ज़लों
से
तब
खेला
करते
थे
ज़ुल्फ़ों
से
वो
फँसता
नइँ
था
बस
बातों
से
काम
लिया
था
दोस्त
इशारों
से
आज
उठाते
हैं
ज़िम्मेदारी
जो
कंधे
दुखते
थे
बस्तों
से
कितना
डरते
हैं
मरहम
से
वो
करना
बात
कभी
तुम
ज़ख़्मो
से
बस
आटा
जलता
हैं
गैसों
पर
रोटी
तो
बनती
हैं
चूल्हों
से
दुख
मुझको
नइँ
हैं
धोखे
का
पर
बस
उम्मीद
नहीं
थी
यारों
से
सोच
'अमन'
नइ
होता
तो
फिर
तू
सोच
कभी
सजता
क्या
ग़ज़लों
से
- Aman Mishra 'Anant'
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पा
ए
उम्मीद
प
रक्खे
हुए
सर
हैं
हम
लोग
हैं
न
होने
के
बराबर
ही
मगर
हैं
हम
लोग
तू
ने
बरता
ही
नहीं
ठीक
से
हम
को
ऐ
दोस्त
ऐब
लगते
हैं
ब-ज़ाहिर
प
हुनर
हैं
हम
लोग
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Abhishek shukla
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किसी
से
कोई
भी
उम्मीद
रखना
छोड़
कर
देखो
तो
ये
रिश्ते
निभाना
किस
क़दर
आसान
हो
जाए
Waseem Barelvi
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झिझकता
हूँ
उसे
इल्ज़ाम
देते
कोई
उम्मीद
अब
भी
रोकती
है
Shariq Kaifi
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हासिल
न
कर
पाया
तुझे
मैं
मिन्नतों
के
बाद
भी
उम्मीद
सेंटा
से
लगाना
लाज़मी
भी
है
मिरा
Harsh saxena
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ये
सच
है
नफ़रतों
की
आग
ने
सब
कुछ
जला
डाला
मगर
उम्मीद
की
ठण्डी
हवाएँ
रोज़
आती
हैं
Munawwar Rana
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बाक़ी
सारे
काम
भुलाकर
इश्क़
किया
सुब्ह
से
लेकर
शाम
बराबर
इश्क़
किया
ग़लती
ये
थोड़े
थी
इश्क़
किया
हम
ने
ग़लती
ये
थी
ग़ैर
बिरादर
इश्क़
किया
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Vashu Pandey
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शाख़-ए-उम्मीद
से
कड़वा
भी
उतर
सकता
हूँ
रोज़
ये
बात
मुझे
सब्र
का
फल
कहता
है
Rakib Mukhtar
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जिसकी
फ़ितरत
ही
बे
वफ़ाई
हो
उस
सेे
उम्मीद-ए-वफ़ा
क्या
करना
Ajeetendra Aazi Tamaam
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तुम्हारे
आने
की
उम्मीद
बर
नहीं
आती
मैं
राख
होने
लगा
हूँ
दिए
जलाते
हुए
Azhar Iqbal
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तुम
सेे
मिल
कर
इतनी
तो
उम्मीद
हुई
है
इस
दुनिया
में
वक़्त
बिताया
जा
सकता
है
Manoj Azhar
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लिखें
कैसे
कि
इच्छा
मर
चुकी
है
हमारी
डायरी
भी
भर
चुकी
है
दु'आ
अब
जितनी
मर्ज़ी
कर
ले
कोशिश
बला
ये
काम
अपना
कर
चुकी
है
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Aman Mishra 'Anant'
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हूँ
सभी
को
इधर
बुरा
मैं
क़ैस
एक
लड़की
का
देवता
मैं
क़ैस
साँस
लेनी
इधर
हैं
कैसे
बोल
हूँ
अभी
दश्त
में
नया
मैं
क़ैस
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Aman Mishra 'Anant'
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गिले
शिकवे
से
पहले
सोच
लेना
मुझे
चुभने
से
पहले
सोच
लेना
मेरे
बारे
में
तुम
क्या
सोचते
हो
मेरे
मरने
से
पहले
सोच
लेना
भरा
हूँ
मैं
निसाबों
से
दुखों
के
मुझे
पढ़ने
से
पहले
सोच
लेना
बहन
है
माँ
है
घर
में
बाप
भी
है
कि
विश
पीने
से
पहले
सोच
लेना
नशे
में
क्या
करोगे
होश
खो
कर
नशा
करने
से
पहले
सोच
लेना
कोई
सोया
कहीं
फ़ुटपाथ
पर
है
कभी
सोने
से
पहले
सोच
लेना
लड़ाई
आर
या
है
पार
की
ये
अमन
लड़ने
से
पहले
सोच
लेना
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Aman Mishra 'Anant'
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रातें
ज़ाया'
नइँ
करता
मैं
जल्दी
सोया
नइँ
करता
मैं
आज
ज़रा
पी
ली
ज़्यादा
बस
वरना
रोया
नइँ
करता
मैं
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Aman Mishra 'Anant'
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ऐसे
कोई
अन
बन
नइँ
है
बस
मेरे
मन
का
मन
नइँ
है
उलझन
में
जीवन
है
मेरा
पर
जीवन
में
उलझन
नइँ
है
इतना
एकाकी
हूँ
प्यारों
अब
साथ
अकेलापन
नइँ
हैं
वरना
मजनू
कोटा
होता
जन्नत
में
आरक्षन
नइँ
है
मैं
भी
कोई
मोहन
नइँ
हूँ
तू
भी
कोई
जोगन
नइँ
है
बेड़ी
में
भी
छन
छन
नइँ
है
पत्थर
में
भी
धड़कन
नइँ
है
मंडप
में
बैठा
हूँ
मैं
पर
क्यूँँ
तू
मेरी
दुल्हन
नइँ
है
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Aman Mishra 'Anant'
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