hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Altaf Iqbal
aap gar ye na samajh paa.e ke duniya kya hai
aap gar ye na samajh paa.e ke duniya kya hai | आप गर ये न समझ पाए के दुनिया क्या है
- Altaf Iqbal
आप
गर
ये
न
समझ
पाए
के
दुनिया
क्या
है
उम्र
भर
रह
के
यहाँ
आप
ने
समझा
क्या
है
मेरी
कोशिश
का
नतीजा
ही
बताता
है
मुझे
मेरी
तकदीर
में
अल्लाह
ने
लिखा
क्या
है
- Altaf Iqbal
Download Sher Image
उम्र
ये
मेरी
सिर्फ़
लबादा
मेरे
खद
ओ
ख़ाल
का
है
मेरा
दिल
तो
मुश्किल
से
कुछ
सोलह
सतरह
साल
का
है!
Vishal Bagh
Send
Download Image
27 Likes
खिलाड़ी
देवकीनंदन
के
जैसा
सामने
हो
तो
तजुर्बा
लाख
हो
शकुनी
भी
चौसर
हार
जाते
हैं
shashwat singh darpan
Send
Download Image
1 Like
क्या
हुआ
जो
मुझे
हम-उम्र
मोहब्बत
न
मिली
मेरी
ख़्वाहिश
भी
यही
थी
कि
बड़ी
आग
लगे
Muzdum Khan
Send
Download Image
62 Likes
इक
उम्र
कट
गई
है
तिरे
इंतिज़ार
में
ऐसे
भी
हैं
कि
कट
न
सकी
जिन
से
एक
रात
Firaq Gorakhpuri
Send
Download Image
32 Likes
काँटों
से
दिल
लगाओ
जो
ता-उम्र
साथ
दें
फूलों
का
क्या
जो
साँस
की
गर्मी
न
सह
सकें
Akhtar Shirani
Send
Download Image
26 Likes
मैंने
चाहा
तेरे
जाने
में
न
कुछ
कमी
रहे
कोन
चाहे
उम्र
भर
ही
आँखों
में
नमी
रहे
Yogamber Agri
Send
Download Image
4 Likes
बड़ा
घाटे
का
सौदा
है
'सदा'
ये
साँस
लेना
भी
बढ़े
है
उम्र
ज्यूँँ-ज्यूँँ
ज़िंदगी
कम
होती
जाती
है
Sada Ambalvi
Send
Download Image
36 Likes
बनाओ
ताजमहल
के
ब-जाए
ताश
महल
तमाम
उम्र
मुहब्बत
करो
गिराओ
बनाओ
Charagh Sharma
Send
Download Image
28 Likes
उम्र
शायद
न
करे
आज
वफ़ा
काटना
है
शब-ए-तन्हाई
का
Altaf Hussain Hali
Send
Download Image
27 Likes
हमारी
उम्र
के
लड़के
ग़ज़ल
तो
लिख
रहे
हैं
पर
ये
इतना
दर्द
लेके
जी
रहे
हैं
ठीक
थोड़ी
है
Ramesh Singh
Send
Download Image
31 Likes
Read More
कभी
दरिया
कभी
तारों
का
मंज़र
क़ैद
करता
हूँ
किसी
क़े
हुस्न
का
जादू
नज़र
भर
क़ैद
करता
हूँ
मैं
शायर
हूँ
मुझे
अल्लाह
ने
ऐसा
हुनर
बख्शा
मैं
काग़ज़
की
लकीरों
में
समुंदर
क़ैद
करता
हूँ
Read Full
Altaf Iqbal
Send
Download Image
3 Likes
इश्क़-ए-अहमद
जिसे
मुयस्सर
नईं
ख़ुल्द
भी
उसका
फिर
मुक़द्दर
नईं
आप
की
सोहबतों
के
सदक़े
में
क्या
है
वो
चीज़
जो
मुअत्तर
नईं
Read Full
Altaf Iqbal
Send
Download Image
3 Likes
इस
ज़िंदगी
की
फ़िल्म
में
आराम
के
सिवा
जो
होना
चाहिए
था
वही
हो
नहीं
रहा
Altaf Iqbal
Send
Download Image
3 Likes
दर्द
आए
उन्हें
नज़र
शायद
देख
कर
मेरी
चश्म-ए-तर
शायद
बस
तसव्वुर
में
मह
जबीनों
के
ज़िस्त
हो
जाएगी
बसर
शायद
इसलिए
बन
संवर
के
रहता
हूँ
देख
ही
लें
वो
इक
नजर
शायद
जब
भी
पूछूँ...
के
इश्क़
है
मुझ
सेे?
मुझको
कहती
है,
हाँ...मगर...शायद!!
तुझ
सेे
रिश्ता
कोई
निकल
आए
अजनबी
कुछ
तो
ग़ौर
कर...
शायद
दर्दे
दिल
और
हो
गया
पुर
लुत्फ़
बे-वफ़ा
का
है
ये
असर
शायद
कल
जो
कहते
थे
हम
ही
सब
कुछ
है
आज
फिरते
हैं
दर-ब-दर
शायद
हाल
अल्ताफ
देखकर
तेरा
रो
पड़ा
कल
तो
चारा
गर
शायद
Read Full
Altaf Iqbal
Download Image
2 Likes
वो
जब
जब
भी
लबे
नाज़ुक
से
मेरा
नाम
लेते
हैं
तो
पहले
बढ़
के
हम
अपना
कलेजा
थाम
लेते
हैं
Altaf Iqbal
Send
Download Image
3 Likes
Read More
Bahadur Shah Zafar
Vishal Bagh
Sarvat Husain
Shahzad Ahmad
Hafeez Banarasi
Unknown
Krishna Bihari Noor
Khalid Nadeem Shani
Shahid Zaki
Abbas Tabish
Get Shayari on your Whatsapp
Dushman Shayari
Raaz Shayari
Aam Shayari
Kanta Shayari
Rahbar Shayari