dard aa.e unhen nazar shaayad | दर्द आए उन्हें नज़र शायद

  - Altaf Iqbal
दर्दआएउन्हेंनज़रशायद
देखकरमेरीचश्म-ए-तरशायद
बसतसव्वुरमेंमहजबीनोंके
ज़िस्तहोजाएगीबसरशायद
इसलिएबनसंवरकेरहताहूँ
देखहीलेंवोइकनजरशायद
जबभीपूछूँ...केइश्क़हैमुझसेे?
मुझकोकहतीहै,हाँ...मगर...शायद!!
तुझसेेरिश्ताकोईनिकलआए
अजनबीकुछतोग़ौरकर...शायद
दर्देदिलऔरहोगयापुरलुत्फ़
बे-वफ़ाकाहैयेअसरशायद
कलजोकहतेथेहमहीसबकुछहै
आजफिरतेहैंदर-ब-दरशायद
हालअल्ताफदेखकरतेरा
रोपड़ाकलतोचारागरशायद
  - Altaf Iqbal
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